मेले के बाद फैलती गंदगी
मेले के समापन के बाद मेला ग्राउंड, मंदिर परिसर, और आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी मात्रा में कचरा फैल जाता है। जगह-जगह प्लास्टिक थैलियां, खाने-पीने के सामान के अवशेष, और सड़ी-गली चीजों के ढेर नजर आते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र बदबू से भर जाता है। यह गंदगी न केवल दृश्य को खराब करती है, बल्कि लोगों के आवागमन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कचरे के कारण मच्छर और अन्य कीटों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा है। बुजुर्ग और बच्चे विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

Gyaraspur Mela: मंदिर ट्रस्ट की अनदेखी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल यह स्थिति बनती है, लेकिन मंदिर ट्रस्ट और ग्राम पंचायत इस ओर ध्यान नहीं देते। मेले के दौरान भले ही भीड़ जुटती हो, लेकिन उसके बाद सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। ग्रामीणों ने बताया कि वे स्वयं कचरा हटाने की कोशिश करते हैं, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में सफाई संभव नहीं हो पाती। उन्होंने मांग की है कि मेले के तुरंत बाद पुख्ता सफाई इंतजाम किए जाएं। साथ ही, प्लास्टिक उपयोग पर रोक और कचरा प्रबंधन के लिए स्थायी व्यवस्था लागू की जाए, ताकि गांव की छवि और जनस्वास्थ्य सुरक्षित रहें।
साफ-सफाई की मांग
धार्मिक आयोजन से जहां श्रद्धालुओं का जुड़ाव बढ़ता है, वहीं साफ-सफाई की अनदेखी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। 10 जुलाई, 2025 को दोपहर 4:29 बजे तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लोगों की मांग है कि मंदिर ट्रस्ट और ग्राम पंचायत मिलकर मेले के बाद त्वरित सफाई अभियान चलाएं और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाएं। यह मेला भले ही आस्था का केंद्र हो, लेकिन गंदगी की समस्या इसे बदनाम कर रही है।
