Gwalior toxic gas tragedy : ग्वालियर के प्रीतम विहार कॉलोनी में एक दर्दनाक हादसा सामने आया था, जिसमें जहरीली गैस ने दो मासूम बच्चों की जान ले ली। वैभव (4) और उसकी बहन क्षमा (13) की मौत से पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है। यह घटना तब हुई जब मकान मालिक ने गेहूं की बोरियों में सल्फास की गोलियां घुन से बचाने के लिए रखी थीं, जिससे नमी और कूलर की हवा के कारण फॉस्फीन गैस बनी और पूरे घर में फैल गई.
हादसे की पूरी कहानी
किराएदार सत्येंद्र शर्मा अपने परिवार के साथ जिस ग्राउंड फ्लोर पर रह रहे थे, वहीं मकान मालिक द्वारा करीब 250 क्विंटल गेहूं में 50 सल्फास गोलियां रखी गई थीं। रात में गर्मी के कारण परिवार ने कूलर चलाया, जिसका एग्जॉस्ट फैन पोर्च से जहरीली गैस खींचकर कमरे में ले आया। कुछ ही देर में सभी सदस्य बेहोश हो गए सबसे पहले वैभव की मौत हो गई, उसके बाद सुबह क्षमा ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया। माता-पिता की हालत गंभीर बताई जा रही है.
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प्रशासन की कार्रवाई
हादसे के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। चार साल पुरानी अवैध दुकान, जहां अनाज भंडारण किया जा रहा था, उसे सील कर दिया गया है। घटना के बाद दुकान संचालक श्रीकृष्ण यादव फरार है। पुलिस ने गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सैंपल लिए हैं और जांच की जा रही है। प्रीतम विहार में लोगों में आक्रोश है और आरोप लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद प्रशासन ने पहले कोई कार्रवाई नहीं की.
सामाजिक असर और जागरूकता
इस हादसे ने ग्वालियर सहित प्रदेशभर में जागरूकता का माहौल पैदा किया है। लोगों को अब जहरीली दवाओं के प्रयोग और अनाज के भंडारण में सुरक्षा नियमों का पालन करने की अहमियत समझ आ रही है। समाजसेवियों की ओर से भी लोगों को सुरक्षित अनाज भंडारण के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन बच्चों की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन्स तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों.
इस घटना ने प्रशासन को झकझोर दिया है, लेकिन मासूमों की मौत की क्षति को कोई भर नहीं सकता। जागरूकता और सख्त नियमों का पालन ही ऐसी घटनाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है।
