Gwalior syrup scandal : ग्वालियर सिरप मामले में ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने की है जिसमें उन्हें सैंपलिंग प्रक्रिया में कार्यालय को समय पर सूचना न देने का दोषी पाया गया।
सिरप की बोतलों में कीड़े
ग्वालियर जिले के अस्पतालों में एजिथ्रोमाइसीन सिरप की कई बोतलों में कीड़ों की शिकायत सामने आई थी। इस सिरप का उपयोग बच्चों के इंफेक्शन के इलाज के लिए किया जाता रहा, लेकिन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। ड्रग इंस्पेक्टर अनुभूति शर्मा ने इन सिरप के कुल 16 सैंपल एकत्रित किए और केंद्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला, कोलकाता भेजे। साथ ही, प्रदेशभर में एजिथ्रोमाइसीन की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई।
जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया
सिविल सर्जन को मिली शिकायत के तहत ड्रग इंस्पेक्टर ने कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, आरोप है कि सैंपल लेने और अन्य जरूरी कार्यवाहियों की जानकारी कार्यालय प्रमुख को नहीं दी गई थी। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन, दिनेश श्रीवास्तव ने इसी लापरवाही के आधार पर अनुभूति शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला गुना रखा गया है।
पूरे प्रदेश में एजिथ्रोमाइसीन सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
नमूनों की लैब जांच के दौरान सामने आने वाली रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सिरप की क्वालिटी पर सवाल उठने के बाद अन्य दवाओं की भी जांच शुरू की गई है।
ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग समेत संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही निश्चित की जा रही है।
दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल
इस घटना ने समाज में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। लोग अब डॉक्टरों व दवा विक्रेताओं से सिरप खरीदते समय सावधानी बरत रहे हैं। विपक्षी दलों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग उठाई है जिससे जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
