ग्वालियर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच शहर की नई सड़क क्षेत्र स्थित प्राचीन पाढ़ाय माता मंदिर, जिसे पहाड़ा वाली माता मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
अधूरी प्रतिमा बनी आस्था का प्रतीक
इस मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता यहां स्थापित मां बघेश्वरी की अधूरी प्रतिमा है. मां शेर पर सवार स्वरूप में विराजमान हैं, लेकिन प्रतिमा के चरण अधूरे हैं। श्रद्धालु इस विशेषता को चमत्कारिक मानते हैं और इसे माता की दिव्य लीला से जोड़ते हैं।
औरंगजेब आया था मंदिर तोड़ने
स्थानीय मान्यता के अनुसार, मुगल शासक औरंगजेब जब ग्वालियर आया, तब उसने मंदिरों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। बताया जाता है कि वह पाढ़ाय माता मंदिर भी पहुंचा, लेकिन मंदिर परिसर में स्थित पीपल के पेड़ पर लगे मधुमक्खियों के छत्ते से अचानक हमला हो गया। इससे घबराकर औरंगजेब और उसके सैनिक बिना किसी नुकसान के वापस लौट गए।
400 साल पुराना इतिहास
मंदिर के पुजारी के अनुसार, यह प्रतिमा मूल रूप से राजस्थान के डीडवाना (जिला नागौर) में विराजमान थी। करीब 400 वर्ष पहले एक नगर सेठ पाढ़ाय को स्वप्न में माता के दर्शन हुए। माता ने उन्हें निर्देश दिया कि वे बिना पीछे मुड़े एक निश्चित दूरी तक चलें। कहा जाता है कि सेठ ने यात्रा पूरी की, लेकिन अंत में पीछे मुड़कर देखने पर प्रतिमा अधूरी अवस्था में प्रकट हुई। यही कारण है कि आज भी मंदिर में स्थापित प्रतिमा के चरण अधूरे हैं।
दिनभर होती है पूजा-अर्चना
नवरात्रि के दौरान मंदिर में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यहां दिन में चार बार आरती और भोग की परंपरा निभाई जाती है, जिससे भक्त किसी भी समय दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं.स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर की मान्यता और चमत्कारिक कथाओं के चलते हर साल नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
