Gukesh vs Hikaru Norway Chess 2025: भारत के युवा शतरंज ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट के तीसरे राउंड में अमेरिका के हिकारू नाकामुरा को हराकर शानदार वापसी की है। इससे पहले उन्हें 2 राउंड में मैग्रस कार्लसन और अर्जुन एरिगैसी से हार का सामना करना पड़ा था।
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आपको बता दें कि, डी. गुकेश का आज 19वां जन्मदिन हैं, और उनकी जीत ने उनके बर्थडे को और खास बना दिया है।
स्टैंडिंग में 5वें नंबर पर पहुंचे गुकेश…
इस जीत के बाद गुकेश अभी स्टैंडिंग में 5वें स्थान पर हैं। नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट की रैंकिंग में फिलहाल अमेरिका के फैबियानो कारुआना टॉप पर हैं, और चौथे राउंड में गुकेश का मुकाबला उन्हीं से होने वाला है। यह मुकाबला टूर्नामेंट के लिहाज से बेहद अहम होगा।

पिछले 2 मुकाबले में मिली थी हार..
नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट 2025 में मौजूदा वर्ल्ड चेस चैंपियन डी गुकेश की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही । टूर्नामेंट के पहले दो मुकाबलों में उन्हें हार मिली, जिससे वह स्टैंडिंग में सबसे नीचे पहुंच गए थे।
दूसरे राउंड में अर्जुन एरिगैसी से शिकस्त…
मंगलवार को खेले गए टूर्नामेंट के दूसरे राउंड में गुकेश को भारतीय युवा ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी ने हराया। यह गुकेश की लगातार दूसरी हार थी। इससे पहले पहले राउंड में उन्हें 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन और मौजूदा वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने मात दी थी।
इस हार के बाद गुकेश छह खिलाड़ियों की स्टैंडिंग में आखिरी स्थान (छठे) पर पहुंच गए हैं।

आपको बता दें कि, नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट 2025 के पहले राउंड में डी गुकेश को वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन ने हराया।
गुकेश की शतरंज यात्रा…
डी. गुकेश का जन्म 29 मई 2006 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता डॉ. राजिनीकांत एक ईएनटी सर्जन हैं, जबकि उनकी माता डॉ. पद्माकुमारी एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं। गुकेश ने सात साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा से सबको प्रभावित किया। उन्होंने 2015 में अंडर-9 एशियाई स्कूल चेस चैंपियनशिप और 2018 में अंडर-12 वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप जीती।

गुकेश ने 15 जनवरी 2019 को 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल किया, जिससे वह इतिहास के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बने। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण टूर्नामेंट्स में भाग लिया और अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से शतरंज की दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
परिवार का योगदान: संघर्ष और समर्थन
गुकेश के माता-पिता ने उनके शतरंज करियर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2017 में, उनके पिता ने अपने करियर से ब्रेक लिया और गुकेश के साथ विभिन्न टूर्नामेंट्स में भाग लेने लगे। इस दौरान, गुकेश के माता-पिता के दोस्तों ने उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की, जिससे वह टूर्नामेंट्स में भाग ले सके। गुकेश ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संघर्ष और समर्थन को दिया है।
उपलब्धियां…
गुकेश ने दिसंबर 2024 में इतिहास रचते हुए सिंगापुर में आयोजित वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के फाइनल में चीन के डिंग लिरेन को 7.5-6.5 से हराकर 18 साल की उम्र में वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब जीता, जिससे वह सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चेस चैंपियन बने। इससे पहले यह रिकॉर्ड गैरी कास्पारोव के नाम था, जिन्होंने 1985 में 22 साल की उम्र में चैंपियनशिप जीती थी।
