Gujarat villages encroachment: गुजरात के ग्रामीण क्षेत्रों में अतिक्रमण की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। राज्य में लगभग 17,571 गांव हैं, लेकिन बीते 20 वर्षों (2005 से अब तक) में केवल 20 से 25 गांवों को ही सार्वजनिक पंजीकरण के माध्यम से भूखंड वितरित किए गए हैं। इस बीच, बढ़ती जनसंख्या के कारण आवास की कमी ने ग्रामीण इलाकों में अतिक्रमण को बढ़ावा दिया है। खासकर ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों ने सरकारी और गैर-कृषि भूमि पर मकान बनाकर अतिक्रमण किया है, जबकि समृद्ध वर्ग अपनी कृषि भूमि या एनए (नॉन-एग्रीकल्चर) भूमि पर घर बना रहा है।
इस समस्या ने गुजरात के गांवों में सामाजिक और प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
आवास की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती
भारत की जनसंख्या में 1947 से 1995 तक 48 वर्षों में जितनी वृद्धि हुई, उतनी ही वृद्धि 1995 से अब तक हो चुकी है। इस बढ़ती आबादी के लिए आवास की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती है। गुजरात में प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत छोटे गांवों में केवल 3 से 5 परिवारों को ही लाभ मिल रहा है, जबकि अतिक्रमण करने वाले परिवारों की संख्या कहीं अधिक है। छोटे गांवों में 100 से 130 और बड़े गांवों में 250 से 400 परिवार अतिक्रमण में शामिल हैं। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध निर्माण और भूमि विवादों को जन्म दे रही है।
Gujarat villages encroachment: भूमि हड़पने वालों पर कार्रवाई
हाल के समय में कुछ स्वार्थी तत्वों ने अतिक्रमणकारी परिवारों के खिलाफ भूमि हड़पने और राज्य प्रशासन द्वारा दमनात्मक कार्रवाई का सहारा लिया है। जिला स्वागत और तालुका स्वागत जैसे मंचों पर सवाल उठाकर इन परिवारों को परेशान करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इस स्थिति ने स्थानीय समुदायों में असंतोष को बढ़ावा दिया है। गिर गढ़डा तालुका पंचायत की उपाध्यक्ष दिवालीबेन भीखाभाई किडेचा ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
आवासीय भूखंडों का सरकारी नियमों के अनुसार नियमित किया जाए
दिवालीबेन ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि जिस तरह शहरी क्षेत्रों में इम्पैक्ट फीस (आईएमपीईटी) लेकर भूमि का नियमितीकरण किया जाता है, उसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में 150 से 200 वर्ग मीटर के आवासीय भूखंडों को भी शुल्क लेकर सरकारी नियमों के अनुसार नियमित किया जाए। इससे न केवल अतिक्रमण की समस्या का समाधान होगा, बल्कि गरीब और ओबीसी समुदायों को कानूनी रूप से आवास का अधिकार भी मिलेगा। साथ ही, इससे सरकार को राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग ग्रामीण विकास के लिए किया जा सकता है।
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प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
यह मांग न केवल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक कदम है, बल्कि सामाजिक समावेशिता को भी बढ़ावा देगी। यदि समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और भूमि विवाद बढ़ सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से इस पत्र पर विचार की उम्मीद की जा रही है, और स्थानीय लोग इस मुद्दे पर सकारात्मक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गुजरात के गांवों में अतिक्रमण की इस जटिल समस्या का समाधान नियमितीकरण और संवेदनशील नीतियों में ही निहित है।
विशाल चौहान की रिपोर्ट
