Gujarat Political Clash: गुजरात विधानसभा चुनाव अभी 2027 में होने हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच जुबानी जंग ने राज्य की सियासत को अभी से गर्म कर दिया है। मोरबी से बीजेपी विधायक कांतिलाल अमृतिया और AAP नेता गोपाल इटालिया के बीच चुनौती और जवाबी चुनौती का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में सोमवार को अमृतिया समर्थकों के “जय श्रीराम” नारों के बीच गांधीनगर के लिए रवाना हुए हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वे विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब विसावदर उपचुनाव में आप नेता गोपाल इटालिया की जीत हुई। जीत से उत्साहित AAP कार्यकर्ताओं ने मोरबी में जन समस्याओं को लेकर विधायक अमृतिया को घेरा और उन पर निशाना साधा। जवाब में अमृतिया भड़क उठे और इटालिया को मोरबी से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर इटालिया यहां से जीतते हैं, तो वे 2 करोड़ रुपये इनाम में देंगे। इटालिया ने यह चुनौती तुरंत स्वीकार कर ली। इसके बाद अमृतिया ने नई शर्त जोड़ते हुए कहा कि अगर इटालिया लड़ने को तैयार हैं, तो पहले वह अपने पद से इस्तीफा दें।
क्या वाकई इस्तीफा देंगे अमृतिया?
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांतिलाल अमृतिया वास्तव में अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपते हैं या नहीं। यदि ऐसा होता है तो मोरबी में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह एक राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास है, जिससे दोनों दल सियासी लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
कांतिलाल अमृतिया की राजनीतिक पृष्ठभूमि
कांतिलाल अमृतिया अब तक सात बार चुनाव लड़ चुके हैं और 2022 में मोरबी ब्रिज हादसे के बाद एक बार फिर विधायक चुने गए थे। उस समय उन्होंने हादसे के दौरान नदी में कूदकर लोगों को बचाने का साहसी काम किया था। इस वजह से बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया और उन्होंने पार्टी की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए जीत हासिल की। यह उनकी चौथी जीत थी और वह क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं।
AAP का सियासी विस्तार और इटालिया की रणनीति
गोपाल इटालिया की विसावदर से जीत ने आम आदमी पार्टी को गुजरात में एक नई ऊर्जा दी है, खासकर सौराष्ट्र क्षेत्र में। मोरबी भी इसी क्षेत्र का हिस्सा है। ऐसे में अगर मोरबी में उपचुनाव होता है तो यह केवल एक चुनाव नहीं बल्कि प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल जाएगा। हालांकि, AAP नेता इसुदान गढ़वी पहले ही साफ कर चुके हैं कि इटालिया इस्तीफा नहीं देंगे, जिससे कयासों को बल मिला है कि यह सब केवल सियासी स्टंट हो सकता है।
सियासी माइलेज की होड़
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम एक राजनीतिक माइलेज की लड़ाई है। कांतिलाल अमृतिया गांधीनगर जाकर कह सकते हैं कि वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर गोपाल इटालिया नहीं पहुंचे तो वह उन पर पलटवार कर सकते हैं। वहीं, इटालिया ने अभी तक विधायक पद की शपथ भी नहीं ली है, जिससे अटकलें और भी तेज हो गई हैं कि यह केवल रणनीतिक पैंतरा है।
