क्या फिर से बढ़ेगा ब्लैक मनी का मामला?
वडोदरा, गुजरात: क्या आपको याद है, 2016 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था? उस दिन से ही देश में एक बड़ा बदलाव आया था। लाखों लोग कतारों में खड़े होकर पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को बदलने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन आज, 9 साल बाद, फिर से वही पुराने नोट सामने आ गए हैं! और वह भी 78 लाख रुपये से ज्यादा के मूल्य के।

जी हां, ये कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत है। वडोदरा पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास इन रद्द किए गए नोटों का जखीरा था। इस खबर ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में ‘ब्लैक मनी’ का खेल अभी भी चल रहा है?
नोटबंदी के 9 साल बाद फिर से पुराने नोट बरामद!
2016 में जब नोटबंदी का फैसला लिया गया था, तो यह सोचकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया था कि इससे देश में भ्रष्टाचार और कालाधन खत्म होगा। लेकिन अब, 9 साल बाद, ये पुराने नोट फिर से सामने आ रहे हैं। वडोदरा के वाघोडिया रोड इलाके में जब पुलिस ने पांच लोगों को पकड़ा, तो उनके पास 78 लाख रुपये से ज्यादा के 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट थे।
पुलिस ने बताया कि ये लोग इन नोटों को 12% के दाम पर बेचने की योजना बना रहे थे। क्या इस तरह की काली कमाई देश की आर्थिक नीतियों को चुनौती नहीं देती? यह सवाल हर नागरिक के दिल में उठता है।
क्या था इस गिरोह का मक्सद?
इस गिरोह का मुख्य आरोपी अशोक कांटावाला था, और उसके पास सबसे अधिक पुराने नोट मिले थे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये नोट कहां से आए? पुलिस के लिए यह मामला किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत हो रहा है। वडोदरा पुलिस इस पूरी साजिश को और गहराई से समझने के लिए जांच कर रही है।
इन 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कुछ आरोपियों के पास वाहन, मोबाइल फोन और अन्य सामान भी जब्त किए गए हैं। इनका लक्ष्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि देश की आर्थिक व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाना था।
यह घटना हमारे लिए एक चेतावनी है!
इस घटना से यह तो साफ हो गया है कि आज भी कुछ लोग भ्रष्टाचार की राह पर चलने से बाज नहीं आ रहे हैं। क्या अब भी ऐसे लोग हैं जो देश की नीतियों का उल्लंघन करने से नहीं थकते? इस सवाल का जवाब हमारे समाज को खुद ही देना होगा।

भारत सरकार द्वारा 2016 में नोटबंदी जैसे बड़े कदम उठाए गए थे, ताकि कालाधन खत्म हो सके और भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सके। लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि हम पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए हैं। यह घटना हमें यह समझने का मौका देती है कि हमें न केवल सरकारी नीतियों पर विश्वास करना है, बल्कि हमें खुद भी अपने आसपास के लोगों की जागरूकता और जिम्मेदारी को बढ़ाना होगा।
क्या हम फिर से पुराने रास्ते पर लौटेंगे?
हमारे देश में कई बार ऐसे हालात आ चुके हैं, जब भ्रष्टाचार और काले धन के मामलों ने हमे शर्मिंदा किया है। लेकिन क्या हम इन घटनाओं से कुछ सीख सकते हैं? हमें अपने समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए स्वच्छता और पारदर्शिता के प्रति अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री मोदी का ‘स्वच्छ भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का विचार सिर्फ सरकारी नीतियों तक ही सीमित नहीं रह सकता। हमें यह भी समझना होगा कि समाज को विकसित और मजबूत बनाने में हर नागरिक का योगदान जरूरी है।
हमारी जिम्मेदारी और जागरूकता
अब समय आ गया है कि हम केवल सरकार के भरोसे न बैठें, बल्कि खुद भी अपनी जिम्मेदारी निभाएं। समाज के हर वर्ग को, चाहे वह व्यापारी हो, किसान हो या आम नागरिक, अपनी भूमिका निभानी होगी। जब तक हम खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक इस तरह की घटनाएं बार-बार घटती रहेंगी। यह वक्त हमारी जागरूकता और संघर्ष का है, ताकि हम अपने समाज को एक मजबूत और भ्रष्टाचार-मुक्त भविष्य दे सकें।
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