greenland us military deployment: ग्रीनलैंड में अमेरिका का सैन्य हस्तक्षेप और वहां के लोग विरोध कर रहे हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के इरादे और मजबूत नजर आ रहे हैं। धमकियों और टैरिफ के बाद अब अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट भी ग्रीनलैंड में उतर चुके हैं। सवाल उठता है, आगे क्या होने वाला है?
greenland us military deployment: अमेरिका की तैनाती
अमेरिका ने ग्रीनलैंड के पिटफिक स्पेस बेस पर अपने सैन्य विमान तैनात कर दिए हैं। यह कदम NORAD यानी उत्तर अमेरिकी एयरोस्पेस डिफेंस कमांड के नियमित सुरक्षा संचालन का हिस्सा बताया गया है। NORAD के मुताबिक यह तैनाती अमेरिका, कनाडा और डेनमार्क के बीच मौजूदा रक्षा सहयोग के अंतर्गत की जा रही है और ग्रीनलैंड प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी गई है।
Also Read-5 दिनों में तीसरी बार जम्मू-कश्मीर में मंडराए पाकिस्तानी ड्रोन, हाई अलर्ट पर सेना
greenland us military deployment: सैन्य तैयारियां और डेनमार्क की भूमिका
पिटफिक स्पेस बेस में मिसाइल चेतावनी प्रणाली मौजूद है, जो उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा के लिए अहम मानी जाती है। इस बीच डेनमार्क ने भी ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। राजधानी नूक और कांगेरलुसुआक में नई टुकड़ियां भेजी गई हैं। पहले से ही वहां 200 से ज्यादा सैनिक तैनात हैं।
टाइमिंग और रणनीतिक महत्व
यह सैन्य तैनाती उस समय हो रही है जब डेनमार्क की अगुवाई में हाल ही में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास हुआ था। ट्रंप ने यह साफ किया है कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति रूस और चीन से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के कारण अहम है। उन्होंने बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा है।
Also Read-Basant Panchami 2026: कब है बसंत पंचमी, जानिए शुभ मूहुर्त?
यूरोप और चीन की प्रतिक्रिया
यूरोपीय देशों में प्रतिक्रिया मिश्रित रही। डेनिश विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका की धमकियों से सतर्क रहना जरूरी है, जबकि जर्मनी ने अमेरिका के रुख को आंशिक रूप से सही माना। चीन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने निजी हितों के लिए चीन का नाम न जोड़े।
