Reporter:- रविन्द्र परमार
महेश्वर: लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर आयोजित तीन दिवसीय 31वें निमाड़ उत्सव का 17 नवंबर को भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर रंगारंग कार्यक्रमों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं और दर्शकों का दिल जीत लिया।
कवियों और कलाकारों ने बांधा समां
देर रात तक चले कार्यक्रम में कवियों ने अपनी कविताओं और गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, निमाड़ के काठी और डिंडोरी के कलाकारों ने गुदुमबाजा नृत्य से उत्सव में सांस्कृतिक रंग भर दिए।
विजेताओं को किया पुरस्कृत
उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कलेक्टर और एसपी ने सम्मानित किया और पुरस्कृत किया।
महेश्वर का किला बना आकर्षण का केंद्र
उत्सव के मुख्य आयोजन स्थल, महेश्वर का ऐतिहासिक किला, रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था, जो बेहद खूबसूरत और आकर्षक लग रहा था।
निमाड़ की परंपरा और संस्कृति का उत्सव
यह उत्सव न केवल निमाड़ की समृद्ध परंपरा और संस्कृति का जश्न था, बल्कि क्षेत्रीय कला, साहित्य और संगीत का भी शानदार प्रदर्शन था।
