सैकड़ों साल पुरानी परंपरा, जहां आस्था ने हराया डर
गोवर्धन पूजा पर गायों का झुंड: उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील में बसे छोटे से गांव भिड़ावद में दीपावली के बाद का एक दिन खास उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। गोवर्धन पूजा के अवसर पर यहां की जनता एक ऐसी परंपरा निभाती है, जो देखने वाले के रोंगटे खड़े कर देती है। सैकड़ों गायों के झुंड को मन्नतधारी ग्रामीणों के ऊपर से दौड़ाया जाता है — एक ऐसा दृश्य जो आस्था, साहस और सामूहिक विश्वास की पराकाष्ठा है।
गोवर्धन पूजा पर गायों का झुंड: मन्नत के लिए जमीन पर लेटे भक्त, ऊपर से गुजरी गायों की फौज
गांव के लोग बताते हैं कि यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। दिवाली से पांच दिन पहले, यानी ग्यारस से ही मन्नतधारी भक्त माता भवानी के मंदिर में उपवास रखना शुरू कर देते हैं। वे भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं, मन को शुद्ध करते हैं और गोवर्धन पूजा के दिन अपनी मन्नत पूरी होने की आस में जमीन पर लेट जाते हैं।
तभी ढोल-नगाड़ों की तेज थाप के बीच सैकड़ों गायों का झुंड उनके ऊपर से तेजी से गुजरता है। धूल उड़ती है, पैरों की आहट गूंजती है, लेकिन लेटे हुए भक्त अटल रहते हैं। उनकी आंखों में भक्ति है, दिल में विश्वास है।
गाय: 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास, आशीर्वाद का स्रोत
ग्रामीणों का मानना है कि गाय पवित्र जीव है, जिसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। उनके पैरों के नीचे लेटने से भगवान का सीधा आशीर्वाद मिलता है। इस आशीर्वाद से न केवल व्यक्ति की मन्नत पूरी होती है, बल्कि पूरे गांव में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
“हम डरते नहीं, क्योंकि जानते हैं कि गाय मां है, वो हमें नुकसान नहीं पहुंचाएगी,” एक मन्नतधारी ने भावुक होकर कहा।
कभी नहीं हुई कोई दुर्घटना, इसीलिए बढ़ती है भीड़
गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि इतने सालों में एक भी दुर्घटना नहीं हुई है। न कोई घायल हुआ, न कोई चोटिल। यही विश्वास लोगों को आकर्षित करता है। हर साल दूर-दराज के गांवों से लोग इस अनोखे दृश्य को देखने भिड़ावद पहुंचते हैं। कई युवा फोटो खींचते हैं, वीडियो बनाते हैं, लेकिन आंखों में विस्मय है — आस्था के आगे डर कैसे मात खा जाता है।
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