God worshipped on Sunday: भारत एक ऐसा देश है जहां हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देवता को समर्पित है। सनातन धर्म में सूर्य को ‘दिव्यता’, ‘प्रकाश’ और ‘जीवन शक्ति’ का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सूर्य देव को 9 ग्रहों में राजा माना गया है। कहा जाता है, कि सूर्य देव की साधना करने से कुंडली के सभी दोष दूर हो जाते हैं। वैदिक काल से लेकर आज तक सूर्य देव की उपासना का अपना विशेष स्थान रहा है।
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आज हम जानेंगे कि रविवार को सूर्य देव की पूजा क्यों की जाती है, इसकी धार्मिक मान्यता, पूजा विधि, ज्योतिषीय महत्व, और इसके लाभ क्या हैं।
रविवार का दिन सूर्य देव को क्यों समर्पित है?
रविवार सप्ताह का पहला दिन माना जाता है, और इसका नाम भी संस्कृत शब्द “रविवार” से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है “सूर्य का दिन” (रवि = सूर्य)। ज्योतिष शास्त्र और वेदों के अनुसार सूर्य ग्रह को सभी ग्रहों का राजा माना गया है। इसलिए रविवार को सूर्य देव की विशेष रूप से पूजा की जाती है।

ब्रह्म पुराण, स्कंद पुराण, और भगवत गीता जैसे ग्रंथों में भी सूर्य देव की उपासना का उल्लेख मिलता है।
धार्मिक मान्यता..
सनातन धर्म में सूर्य देवता को प्रत्यक्ष देव कहा गया है, क्योंकि उन्हें हम आंखों से देख सकते हैं। कहा जाता है कि सूर्य देव स्वास्थ्य, बल, बुद्धि, प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य की पूजा करने से जीवन में अंधकार दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
रामायण में हनुमान जी ने सूर्य को अपना गुरु माना था। वहीं कुंती ने भी सूर्य देव की तपस्या कर उनके आशीर्वाद से कर्ण को प्राप्त किया था।
रविवार को सूर्य देव की पूजा विधि…
रविवार को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
1. प्रात: स्नान करके साफ वस्त्र पहनें।
2. तांबे के लोटे में जल भरें, उसमें कुंकुम, अक्षत (चावल), लाल फूल और मिश्री डालें।
3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य को अर्घ्य दें – यानी जल को सूर्य की ओर देखते हुए धीरे-धीरे गिराएं।
4. सूर्य मंत्र का जाप करें, जैसे:
“ॐ सूर्याय नमः”
“ॐ घृणिः सूर्य आदित्यः”
5. अर्घ्य देने के बाद सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
6. व्रत रखने वाले दिनभर फलाहार करें और नमक से परहेज करें।
रविवार व्रत की कथा (संक्षेप में)
एक बार एक ब्राह्मण परिवार बहुत ही दरिद्रता में जीवन यापन कर रहा था। तब एक साधु ने उन्हें रविवार व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने पूरे नियम से 7 रविवार का व्रत रखा और सूर्य भगवान की पूजा की। कुछ ही समय में उनके घर में धन-धान्य, सुख-शांति और समृद्धि लौट आई।

यह व्रत आज भी कई भक्त नियमित रूप से रखते हैं और सूर्य देव से आरोग्यता और सफलता की कामना करते हैं।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व…
भारत के कई हिस्सों में सूर्य मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं, जैसे-
1. कोणार्क सूर्य मंदिर (ओडिशा)
2. मोढेरा सूर्य मंदिर (गुजरात)
3. मार्कण्डेय मंदिर (बिहार)
इन मंदिरों में रविवार को विशेष पूजा और मेलों का आयोजन होता है।
