भोपाल के पिपलानी इलाके के 40 क्वार्टर में बुधवार रात एक नवजात के शव को स्ट्रीट डॉग नोंच रहा था। घटना को देख रहे बच्चों ने तुरंत डॉग को भगाया और शव को छुड़ाकर परिजनों को इस बारे में जानकारी दी। बाद में पुलिस को सूचित किया गया और शव को बरामद कर मामले की जांच शुरू की गई।
पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगालना शुरू कर दिया है। एसीपी दीपक नायक ने बताया कि कई जगहों से फुटेज मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है ताकि संदिग्ध की पहचान की जा सके। साथ ही, पुलिस ने आसपास के अस्पतालों में हाल में हुई डिलीवरी के रिकॉर्ड भी निकाले हैं। एसीपी के मुताबिक, शव देखकर यह अनुमान लगाया गया है कि यह प्री-मेच्योर डिलीवरी का मामला हो सकता है, हालांकि यह पूरी जानकारी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगी।
इससे पहले, ऐशबाग इलाके में एक महिला नर्स ने नवजात के शव को बोरी में फेंक दिया था, और दो दिन बाद नवजात की मौत हो गई थी। इसके अलावा, भोपाल देहात में भी तालाब के किनारे एक नवजात शव मिला था।
40 कैमरों को ट्रेस कर आरोपी तक पहुंची पुलिस
पुलिस ने आरोपी महिला की पहचान करने के लिए रोड मैप तैयार किया और बाग उमराव दूल्हा से नवीन नगर तक 40 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए गए। इस जांच के बाद पुलिस आरोपी महिला तक पहुंचने में सफल रही। सबसे पहले आसमा नामक महिला को गिरफ्तार किया गया, जिसने अपने सहयोगी डॉक्टर सुरेंद्र नाहर का नाम लिया। दोनों की निशानदेही पर पुलिस नाबालिग मां के घर तक पहुंची।
नाबालिग पीड़िता के बारे में जानकारी
पीड़िता की नानी ने बताया कि लड़की पिछले दो महीने से घर से गायब थी और उसे अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी दी जाती थी। पीड़िता की मां ने किसी को भी घटना के बारे में बताने से मना किया था। पुलिस की जांच में पता चला कि नाबालिग लड़की की मां ने आसमा नामक नर्स को नवजात के शव को ठिकाने लगाने के लिए 60 हजार रुपए एडवांस दिए थे।
पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच में लगी हुई है और आरोपी महिलाओं और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर रही है।
आरोपी डॉक्टर अशोका गार्डन में प्राइवेट क्लीनिक का संचालन करता है। जो पुलिस हिरासत में खुद को भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ का मंडल अध्यक्ष बता रहा है। उसने घर और क्लीनिक पर भी बीजेपी के पद के साथ नेम प्लेट लगा रखी है।
