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GI Tag in Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश के 19 GI टैग वाले प्रसिद्ध उत्पादों की सूची

Sanjay Bairagi July 23, 2025

GI Tag in Madhya Pradesh: जानिए मप्र के किन-किन चीजों को मिला है जीआई टैग!

देश का दिल यानी मध्य प्रदेश की समृद्ध विरासत, सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव संरक्षण केंद्र  रूप में  तो जाना जाता हि है इसके अलावा अपने खानपान के इनोवेटिव उत्पाद के लिए भी मशहूर है। इन्हीं उत्पादों को विशेष पहचान और संरक्षण देने का काम करता है जीआई टैग।

क्या होता है जीआई टैग?

GI (Geographical indication) यानि भौगोलिक संकेत ये किसी विशेष वस्तु, उत्पाद या कला को उसकी विशिष्ट पहचान को उस भौगोलिक क्षेत्र में प्रोत्साहन व संरक्षण के उद्देश्य के लिए दिया जाता है।

कौन जारी करता है ये टैग?

GI TAG भारत सरकार  उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य तथा उद्योग के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन करके जारी किया जाता है ।
कितने जीआई टैग है मध्य प्रदेश के पास…

अभी तक मध्यप्रदेश के पास कुल 19 जीआई टैग है । आखिरी जीआई टैग रतलाम के रिजवान लहसुन को मार्च 2024 में दिया गया था।

मध्यप्रदेश के किन किन उत्पादों को मिला है जीआई टैग

 


इस लिस्ट में MP की कला उत्पाद प्रमुख क्षेत्रीय भोजन को लिया गया है जिसकी सूची इस प्रकार है-

• अशोकनगर की मशहूर चंदेरी साड़ी।
• इंदौर की महेश्वर साड़ी ।
• बाघ प्रिंट जो मंदिरो व वस्त्रों पर लकड़ी से देते है ।
• इंदौर के चमड़े से बने खिलौने ।
• बालाघाट का सुगंधित चिन्नौर चावल ।
• दतिया-टीकमगढ़ के तांबे और टिन की मूर्तियां ।
• चाना और आटे से बना रतलाम का खास रतलामी सेव ।• मुरैना की गजक ।


• झाबुआ का काला कड़कनाथ मुर्गा ।
• ग्वालियर को हस्तनिर्मित कालीन ।
• सीहोर का शरबती गेहूं ।
• डिंडोरी का गढ़ा लोहा जिसे अगरिया जनजाति द्वारा संरक्षित किया जाता है ।
• उज्जैन कि बटिक पेंट ।
• महोबा का देशावरी पान।
• रीवा का सुंदरजा आम।
• प्रसिद्ध  गोंड पेंटिंग ।


• वरा सिवनी की साड़ी एवं हस्तशिल्प ।
• जबलपुर के भेड़ाघाट का स्पेशल पत्थर शिल्प ।
• रतलामी रिजवान लहसुन ।

 

जानिए GI TAG का इतिहास…

वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय ने 1999 में भौगोलिक संकेत अधिनियम 1999, पारित किया। जिसके बाद से जीआई टैग देना प्रारंभ हुआ । सबसे पहला जीआई टैग दार्जिलिंग चाय को दिया गया है ।

GI TAG  में कौन हीरो कौन जीरो….

जीआई टैग के मामले में कौन से राज्य हैं आगे और कौन से पीछे एक नजर इस पर भी डालते है…

टॉप 5 राज्य जो हैं सबसे आगे –

1. उत्तर प्रदेश (77)
2. तमिलनाडु (69)
3. कर्नाटक (58)
4. केरला (39)
5. महाराष्ट्र (35)

मार्च-अप्रैल  2025 अभी तक भारत में कुल 658 जीआई टैग किए जा चुके हैं ।

जीआई टैग के क्या फायदे मिलते है ?

• किस उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय जिस भी वस्तु को जीआई टैग प्रदान करती है उस वस्तु अथवा कला को संरक्षित करने के साथ उससे वैश्विक बाजार तक पहुंचने में सहयोग भी करती है ।
• जीआई टैग के तहत उत्पादों को पेटेंट और कॉपीराइट के तहत आरक्षण दिया जाता है।
• यह विशेष रूप से जैव विविधता स्थानीय पारंपरिक शिल्प निर्माण एवं प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षण देता है ।
• उससे अलग अलग सरकारी मंचों पर प्रकट करती है । और ये भी सुनिश्चित करती है कि उसको उससे विशेष भौगोलिक क्षेत्र के अलावा कहीं और से प्राप्त न किया जा सके ।
• प्राप्त करने के बाद सरकार उस उत्पाद की ब्रांडिंग करने में सहायता देगी इसके लिए उत्पादक को ऋण व सहायता राशि भी दी जाती है विभिन्न योजनाओं जैसे वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट जैसे स्टॉल लगाए जाते है जिसमें इन उत्पाद को रखा जाता है ।

रोज़गार-जनसंख्या अनुपात में वृद्धि: जीआई की श्रम-गहन प्रकृति भारत में रोज़गार-जनसंख्या अनुपात को बढ़ावा देने के लिये सर्वश्रेष्ठ समाधान प्रदान करती है, जो वर्तमान में 55% के वैश्विक औसत की तुलना में महज 43% है।

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