यूरोप की सबसे बड़ी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी जर्मनी की अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट से जूझ रही है जो की अपने औद्योगिक उत्पादन, एक्सपोर्ट्स, टेक्नोलॉजी के लिये जानी जाती है आज 2008 की मंदी के बाद से सबसे
कमजोर स्तिथि मे आ गई है l
जर्मनी जहाँ एक तरफ महंगाई की मार से जूझ रहा है वहीं दुसरी और लीथियम पर बढ़ती निर्भरता और एक्सपोर्ट्स मे कमी और साथ ही एनर्जी उत्पादों की बढ़ती किम्मतें भी परेशानी का सबब बने हुऐ हैं l
जर्मनी पर आर्थिक संकट और मंदी के मुख्य कारण –
वैश्विक माँग मे कमी – जर्मनी एक एक्सपोर्ट प्रधान देश है विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल्स और मशीनरी
अब चूंकि इन वस्तुओं की वैश्विक माँग मे कमी आई है इसलिए अर्थव्यवस्था पर संकट छा गया है l
आपूर्ति मे देरी – कोविड काल के बाद से ही सारे विश्व मे आपूर्ति मे देरी की समस्या बनी हुई है खास्कार उन देशों मे
जो कच्चे माल के लिये दूसरे देशों पर निर्भर है और जर्मनी भी उन्ही देशों मे शामिल है जिस वजह से दूसरे देशों से
कच्चे माल की आपूर्ति से होने वाली देरी के कारण लागत मे बढ़ोतरी हो रही है जिस वजह से उत्पादन पर असर पढ़
रहा है l
ऊर्जा संकट – जर्मनी बहुत हद तक प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिये रूस पर निर्भर है और चूंकि रूस और उक्रने
युद्ध के दौर से गुजर रहे हैं इस कारण ऊर्जा और गैस के दामों मे भारी बढ़ोतरी ही गई है ऐसी अवस्था मे जर्मनी मे
औद्योगिक उत्पादन महंगा हो गया है l
महंगाई मे बढ़ोतरी और खर्च मे कमी – गैस और प्राकृतिक ऊर्जा की किम्मतों मे आये उछाल के कारण सभी वस्तुओं
की किम्मतों मे भी उछाल आ गया है जिस वजह से घरेलू लोगों के माल खरीदने की क्षमता मे कमी आ गई है जिस
कारण माँग भी कमजोर हो गई है और अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ रहा है l चूंकि जर्मनी यूरोपिय संघ का मुख्य आर्थिक स्तम्भ है और इटली ग्रीस जैसे यूरोपिया देशों को मादा देता है पर यह देश भी आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं इस कारण इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भी जर्मनी की अर्थव्यवस्था पर पढ़कर इसे कमजोर बना रहा है l
