Gariyaband hospital Laparwahi: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अस्पताल प्रबंधन में लापरवाही के चलते एक व्यक्ति की जान चली गई। 8 फरवरी की रात एक निमोनिया पीड़ित 35 वर्षीय व्यक्ति को हॉस्पिटल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई गई लेकिन एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था, जिसकी वजह मरीज ने दम तोड़ दिया।
दरअसल, गरियाबंद के निवासी बसंत देवांगन की तबीयत अचानक बिगड़ गई। रात करीब 8 बजे उन्हें सोमेश्वर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और 12 घंटे बीतने के बाद रविवार की सुबह डॉक्टर ने मरीज को निमोनिया से ग्रसित बताया और कहा कि मरीज की एक हड्डी भी टूटी है।

परिजनों का हॉस्पिटल प्रबंधन पर आरोप
मौत के बाद हॉस्पिटल प्रबंधन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान एक लेडी डॉक्टर से जमकर बहस भी हुई। मृतक के परिजनों कहा कि- ‘आपको नम्रता से बात करना चाहिए।’ इसके जबाव डॉक्टर ने गुस्से में कहा- ‘ऐसे लोगों के लिए मेरे पास नम्रता नहीं है।’

परिजनों का आरोप है कि, मरीज की हालत खराब हो रही थी, इस वजह से उन्हें रायपुर ले जाने का फैसला किया लेकिन अस्पताल प्रबंधन मरीज को बाहर रेफर करने में लगातार टालमटोल करता रहा और ले जाने से मना करता रहा। अस्पताल प्रबंधन ने यहां तक कह दिया कि “अगर मरना ही है तो यहीं मरेगा।”
अस्पताल प्रबंधन ने शव को एंबुलेंस से घर ले जाने से किया मना
देर से एंबुलेंस उपलब्ध कराने की वजह से मरीज की मौत हो गई। इतना ही नहीं फिर जब परिजनों ने शव को एंबुलेंस से घर ले जाने की बात कही तो इस पर हॉस्पिटल प्रबंधन ने शव को एंबुलेंस से ले जाने से साफ इनकार कर दिया। और कहा 108 पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाओ। इससे गुस्साएं परिजनों ने प्रदर्शन करना शुरु कर दिया।

हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग
जब हंगामा बढ़ता गया तो सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वहां के स्थिति को संभाला और परिजनो को समझाकर प्रदर्शन शांत किया। फिर शव को एंबुलेंस से ही ले जाया गया। परिजनो ने हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
