व्रत और खाने की आदतें
frequent fasting snacks benefits and risks: उपवास को लेकर लोगों की आदतें अलग अलग होती हैं। कुछ लोग उपवास से पहले दिन भर जमकर भोजन करते हैं ताकि उपवास के दौरान भूख कम लगे, जबकि कुछ लोग व्रत के दिन भी बार-बार फलाहार करते हैं। लेकिन क्या व्रत के दौरान बार-बार फलाहार करना सही है? इस पर विशेषज्ञों की अलग राय है।
आयुर्वेद और पोषण विज्ञान की सलाह
आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों का मानना है कि व्रत का मूल उद्देश्य शरीर को आराम देना और पाचन तंत्र को डिटॉक्स करना होता है। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है, जिससे गैस, भारीपन और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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बार-बार फलाहार का असर
उपवास के दौरान बार-बार कुछ न कुछ खाना व्रत की भावना के खिलाफ है। फलाहार का मतलब पूरे दिन खाने-पीने की आदत नहीं बल्कि सीमित मात्रा में संतुलित पोषण लेना है। फल, सूखे मेवे या दूध जैसे हल्के आहार ही उपयुक्त होते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि आप स्वस्थ हैं तो व्रत के दिन सिर्फ एक बार हल्का फलाहार करना काफी होता है। इससे शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है और पाचन तंत्र को भी आराम मिलता है। इसलिए व्रत को केवल धार्मिक कर्तव्य न समझकर इसे स्वास्थ्यवर्धक अभ्यास के रूप में अपनाना चाहिए।
व्रत का सही संतुलन
frequent fasting snacks benefits and risks: व्रत के दिन हल्का और सुपाच्य भोजन करें और संयमित फलाहार को प्राथमिकता दें। इससे न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि व्रत की धार्मिक भावना भी पूरी होती है। सही संतुलन से व्रत एक लाभकारी और ऊर्जा देने वाला अनुभव बन जाता है।
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