Food Poisoning in Children: गर्मी के मौसम में फूड पॉइजनिंग के मामले अचानक बढ़ जाते हैं, और सबसे ज्यादा इसका असर बच्चों पर देखने को मिलता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आई रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के हफ्तों में अस्पतालों में फूड पॉइजनिंग के मामलों में इजाफा देखा गया है, जिनमें बड़ी संख्या छोटे बच्चों की है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर होती है, जिससे वे दूषित भोजन या पानी से जल्दी संक्रमित हो जाते हैं।
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Food Poisoning in Children: बच्चों में फूड पॉइजनिंग की वजह…
फूड पॉइजनिंग का मतलब…
इसका मतलब है, भोजन विषाक्तता एक ऐसी स्थिति है, जब कोई व्यक्ति दूषित खाना या पानी का सेवन कर लेता है, तो पेट से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो जाता है। यह स्थिति बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी के कारण होती है, जो खाने या पीने की चीजों के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं।
बाहर का खाना या अधपके भोजन का सेवन..
बच्चो का बिना सही से पका हुआ खाना खा लेना। अधपका मांस, अंडा, या दूषित दूध फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकते हैं। स्ट्रीट फूड वो बिना देखे खाना कैसा है, खराब तो नहीं खा लेते है, जिसकी वजह से यह समस्या बच्चो में ज्यादा होती है।

एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ और बासी खाना…
बासी खाना बैक्टीरिया और फंगस की खेती बन जाता है। बच्चे बिना देखे या सूंघे खाना खा लेते हैं, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। बच्चो की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिसकी वजह से यह समस्या जल्दी पैदा हो जाती है।
गंदे हाथ और बर्तन..
बच्चे कई बार बिना हाथ धोए खाना खा लेते हैं। साथ ही अगर उनके खाने के बर्तन साफ न हों, तो भी संक्रमण हो सकता है। वो दिनभर धूल मिट्टी और तरह – तरह के खिलौने खेलते है, जिससे हाथ गंदे हो जाते है, और बिना हाथ धोए जब खाना खाते है, तो फूड पॉइजनिंग होने की समस्या ज्यादा होती है।
खुले में रखा हुआ खाना नुकसानदायक…
गर्मियों में खुले में रखा खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है। घर में कटे फल या पका भोजन अगर लंबे समय तक बाहर पड़ा रहे, तो उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। और बच्चे तो यहां वहां से आए उठाकर खा लिया। ऐसे में बच्चो की सेहत पर असर पड़ता है।
गंदा पानी या बर्फ..
बाजार का पानी, सड़क किनारे मिलने वाला शरबत या बर्फ का गोला जैसे आइटम संक्रमित हो सकते हैं। कई बार नलों से मिलने वाला पानी भी फिल्टर न होने के कारण बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है।

फूड पॉइजनिंग के लक्षण…
1. उल्टी और मितली
2. दस्त या डायरिया (कभी-कभी खून के साथ)
3. पेट दर्द और ऐंठन
4. तेज बुखार
5. कमजोरी और चक्कर आना
6. भूख में कमी
7. डिहाइड्रेशन के संकेत – जैसे शुष्क होंठ, कम पेशाब, रोते समय आंसू न आना
सावधानियां…
1. खाना खाने से पहले और बाद में बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें।
2. बच्चों को ताजा, घर का बना गर्म खाना खिलाएं।
3. बासी या फ्रिज में रखा खाना दोबारा अच्छी तरह गर्म करके दें।
4. बाहर का खाना सीमित करें, गर्मी में स्ट्रीट फूड से बचें।
5. खुले में बिकने वाले जूस, आइसक्रीम या बर्फ के उत्पादों से बच्चों को दूर रखें।
6. बच्चों को उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिलाएं।
7. लंबे समय तक खुले में कटे फल जल्दी खराब हो जाते हैं। बच्चों को तुरंत कटे और धोए हुए फल दें।

बच्चों में फूड पॉइजनिंग का घरेलू इलाज..
1. डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए ORS या नमक-चीनी-पानी का घोल पिलाएं।
2. दही में मौजूद प्रोबायोटिक्स आंतों की सफाई में मदद करते हैं
3. नारियल पानी यह इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।
4. बच्चे को आराम करने दें और खिचड़ी, सूप या दलिया जैसे हल्के भोजन दें।
