योगी की मदद से मिली नई जिंदगी
यह कहानी सिर्फ एक इलाज की नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशीलता की मिसाल है। ग्वालटोली की रहने वाली खुशी जन्म से ही मूक-बधिर थी। बहुत कोशिश कि लेकिन वो बोल नहीं पाई। लेकिन उसके मन में एक उम्मीद थी कि CM योगी आदित्यनाथ उसकी मदद जरूर करेंगे। इसी उम्मीद से 20 नवंबर 2025 को खुशी बिना किसी को बताए घर से निकली, और वह कानपुर से लखनऊ तक का 90 किलोमीटर का सफर तय कर मुख्यमंत्री आवास पहुंची।

Khushi Gupta Thank You Yogi: अकेले पहुंची CM आवास
22 नवंबर को जब वह CM आवास के बाहर रोती मिली, तो पुलिस उसे थाने ले गई। वहां खुशी ने इशारों और अपनी स्क्रैच आर्ट के जरिए पुलिस को समझाया कि वह CM योगी से मिलना चाहती है। वहीं दुसरी और खुशी के पिता कल्लू बेटी के गायब होने से परेशान थे, तभी लखनऊ पुलिस ने उन्हें फोन किया, जब वे लखनऊ पहुंचे, तो पता चला कि खुशी की जिद मुख्यमंत्री योगी तक पहुंच चुकी है।
CM योगी ने की मदद
26 नवंबर 2025 को खुशी अपने परिवार के साथ CM आवास पहुंची, और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। CM ने उसकी पढ़ाई, कान की मशीन और परिवार के लिए आवास की व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद प्रशासन ने खुशी का इलाज शुरू हुआ। 5 दिसंबर को एक छोटा ऑपरेशन हुआ, लेकिन उससे लाभ नहीं मिला। इसके बाद जांच की गई और बताया कि खुशी को ‘कोक्लियर इम्प्लांट’ की जरूरत है, जिसका खर्च 6 से 7 लाख रुपए आएगा। एक गरीब परिवार के लिए यह रकम बहुत बड़ी थी, लेकिन राज्य सरकार ने इसका पूरा जिम्मा उठाया।

पहला शब्द – योगी जी थैंक्यू
Khushi Gupta Thank You Yogi: फाउंडेशन और दिव्यांगजन अधिकारी की मदद से 26 जनवरी 2026 को खुशी का सफल ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन सफल रहा और अब खुशी सुनने लगी। वह धीरे-धीरे बोलने की कोशिश कर रही है। खुशी ने CM योगी को थैंक्यू कहा। खुशी को अभी स्पीच थेरेपी दी जा रही है। 3 महीने में वह काफी हद तक बोलने लगेगी और एक साल के अंदर सामान्य बच्चों की तरह बातचीत भी कर सकेगी। खुशी ने मुख्यमंत्री योगी के साथ की एक पेंटिंग भी बनाई। जिसे वो खुद मुख्यमंत्री योगी को देगी।
