मार्च से अब तक कच्चे तेल की कीमत में अंतर्राष्ट्रीय बाजाऱ में तक़रीबन 19 % की कमी आई है और फिलहाल यह
75 डॉलर प्रति बैरल की निचे है तोह भारतीय जनता इस बात से यह अनुमान तो लगा ही सकती है की शायद पेट्रोल
और डीजल की कीमतों में कमी आई और महंगाई किसी हद तक कम हो तो आइये समझते हैँ इसकी संभावना और
अर्थव्यवस्था पर इसकी प्रभाव को |
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गिरावट का कारण
माना जा रहा है की चीन में मांग की कमी की चलते कीमत में गिरावट दर्ज की गई है हालांकि, कुछ जानकार ग्लोबली मांग में गिरावट को मुख्य वजह बता रहे हैँ हालांकि इसका कोई ठोस आधार नहीं है | ओपेक की रिपोर्ट की अनुसार ऑइल डिमांड फॉरेकास्ट 2.11 मिलियन बैरेल प्रति दिन से घटकर 2.03 मिलियन बैरेल प्रति दिन रहने का अनुमनन है | भारत में पेट्रोल – डीज़ल की कीमतें हालांकि ऑइल मार्केटिंग कम्पनियाँ हर 15 दिन में तय करती हैँ लेकिन ऐसा अमूमन होता नहीं है और आखिरी बार 15 th मार्च 2024 को किम्मतों में कटौती की गई थी |
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कीमत में कमी का अर्थव्यवस्था पर असर
पेट्रोल और डीज़ल की कीमत में कमी का सीधा असर ट्रांसपोर्ट और लोजिस्टिक्स पर पढता है और ज़रूरी और रोजाना उपयोग की वास्तुओं की कीमत सीधे तौर पर कम होती है | महंगाई में कमी आती है और कार और दुपहिया वाहन उपभोगता बचत का एक हिस्सा अर्थव्यवस्था के अन्य सेक्टर पर खर्च करने के लिए प्रेरित होते हैँ |चूंकि आने वाले दिनों में हरियाणा और जम्मू कश्मीर में चुनाव होने हैँ और इस साल के अंत में महाराष्ट्र और झारखण्ड में भी चुनाव हैँ तो जनता सरकार से यह उम्मीद कर सकती है इस आने वाले त्यौहारों के मद्देनज़र पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में कुछ कमी देखी जाये |
