Film Ghooskhor Pandat Controversy: अपकमिंग फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ रिलीज होने से पहले ही विवादों में घिर गई है। दरअसल फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज ने आपत्ति जताई है। इसी बीच बढ़ते विवाद को देखकर फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने इस पर ऑफिशियल बयान जारी किया। और उन्होंने कहा कि यह फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है।
इतना ही नहीं फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया और यूट्यूब सब जगह से हटा दिया गया।
फिल्म के प्रोड्यूसर ने फिल्म को लेकर दी सफाई
फिल्म को लेकर प्रोड्यूसर नीरज पांडे ने लिखा कि- “हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है।”
उन्होंने आगे लिखा कि-
‘एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है।’

‘फिल्म को देखने के बाद आंका जाए’- प्रोड्यूसर
‘हम समझते हैं कि फिल्म के टाइटल से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और हम उन भावनाओं का सम्मान करते हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हमने फिलहाल फिल्म से जुड़ा सारा प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है। हमारा मानना है कि फिल्म को पूरी तरह देखकर और उसकी कहानी के संदर्भ में समझा जाना चाहिए, न कि सिर्फ कुछ झलकियों के आधार पर उसे आंका जाए। मैं जल्द ही यह फिल्म दर्शकों के साथ शेयर करने के लिए उत्सुक हूं।’
फिल्म को लेकर क्यों हो रहा विवाद?
फिल्म के टाइटल ‘घूसखोर पंडत’ पर कई लोगों ने आपत्ति जाहिर की है। उनका कहना है कि ‘पंडत’ शब्द आम तौर पर ब्राह्मण समाज और धार्मिक विद्वानों से जुड़ा है, लेकिन इसके साथ ‘घूसखोर’ शब्द जोड़ना बहुत गलत है।
लोगों का कहना है कि, ‘इस टाइटल के जारिए ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है।’

कई शहरों में फिल्म का कर रहें प्रदर्शन
फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ में एक्टर मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित के किरदार में नजर आएंगे। इस फिल्म में उनको पडंत उपनाम से पुकारा जाएगा।
इस फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज में सबसे ज्यादा नाराजगी देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में ब्राह्मण समुदाय के लोग इस फिल्म का जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
फिल्म के खिलाफ मामला दर्ज
जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद फिल्म और प्रोड्यूसर के खिलाफ FIR भी दर्ज किया गया। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने मुंबई के समता नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि- फिल्म का टाइटल आपत्तिजनक है और इसकी तुरंत जांच की जानी चाहिए। वहीं, लखनऊ के हजरतगंज थाने में सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फिल्म के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
वहीं इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है, जिसमें फिल्म के टाइटल को आपत्तिजनक बताते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। यह याचिका महेंद्र चतुर्वेदी ने अधिवक्ता विनीत जिंदल के माध्यम से दाखिल की।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी फिल्म के टाइटल को लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को नोटिस भेजा है। आयोग ने कहा है कि-‘ इस तरह के टाइटल और फिल्म कंटेंट से न केवल समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ सकता है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को भी खतरा हो सकता है, इसलिए मामले को ध्यान से देखा जाना चाहिए।’

बता दें कि, यह नोटिस फिल्म संस्था फिल्म मेकर्स कंबाइन ने नीरज पांडे और नेटफ्लिक्स को भेजा है। संस्था का कहना है कि- ‘फिल्म के टाइटल के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई, जो इंडस्ट्री के नियमों के खिलाफ है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि बिना अनुमति टाइटल इस्तेमाल करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।’
