Fatty Liver Symptoms and Treatment: फैटी लिवर एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो मौजूदा समय में बेहद आम होती जा रही है, खासकर शहरी जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण। यह बीमारी तब होती है जब लिवर (जिगर) में वसा (फैट) जमा हो जाती है। शुरुआती चरण में इसके कोई खास लक्षण नहीं होते, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, दुनियाभर में फैटी लिवर रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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फैटी लिवर क्या होता है?
फैटी लिवर, जिसे चिकित्सकीय भाषा में “हेपेटिक स्टीटोसिस” कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में वसा का अत्यधिक जमाव हो जाता है। आमतौर पर लिवर में कुछ मात्रा में फैट होना सामान्य है, लेकिन जब यह मात्रा 5-10% से अधिक हो जाती है, तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है।
यह बीमारी दो प्रकार की होती है –
1. अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD): यह शराब के अत्यधिक सेवन के कारण होता है।
2. नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD): यह बिना शराब पिए भी हो सकता है, और इसका संबंध मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और गलत जीवनशैली से होता है।

फैटी लिवर के कारण
फैटी लिवर होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से प्रमुख हैं-
1. गलत खानपान: तले-भुने भोजन, फास्ट फूड, अधिक चीनी और ट्रांस फैट का सेवन लिवर में फैट बढ़ा सकता है।
2. मोटापा: मोटे लोगों में फैटी लिवर की संभावना अधिक होती है क्योंकि शरीर में अतिरिक्त वसा लिवर में भी जमा होने लगती है।
3. डायबिटीज: टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में फैटी लिवर की समस्या आम होती है।
4. कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का बढ़ना: लिवर में फैट जमने का एक और कारण है हाई कोलेस्ट्रॉल।
5. शराब का सेवन: लंबे समय तक अत्यधिक शराब पीने से लिवर क्षतिग्रस्त होता है और उसमें वसा जमने लगती है।
6. अनुवांशिकता: अगर परिवार में किसी को फैटी लिवर है, तो इसकी संभावना अधिक होती है।
7. तेजी से वजन घटना या अत्यधिक भूखा रहना: इससे मेटाबोलिज्म पर असर पड़ता है और फैटी लिवर की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
फैटी लिवर के लक्षण…
फैटी लिवर को अक्सर “साइलेंट डिजीज” कहा जाता है क्योंकि इसके प्रारंभिक चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन जब यह बीमारी बढ़ने लगती है तो कुछ लक्षण सामने आते हैं:
1. ऊपरी दाएं पेट में भारीपन या दर्द
2. थकान और कमजोरी
3. भूख में कमी
4. वजन घटने लगना
5. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (जॉन्डिस)
6. पेट फूलना
7. ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई (अत्यंत मामलों में)
8. लिवर एंजाइम्स का बढ़ जाना (जैसे SGOT, SGPT)
यदि फैटी लिवर समय रहते नियंत्रित न किया जाए, तो यह नॉन-अल्कोहॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH), फाइब्रोसिस, और अंततः सिरोसिस जैसे खतरनाक रूप ले सकता है।
फैटी लिवर की जांच कैसे होती है?
1. ब्लड टेस्ट: लिवर एंजाइम्स की जांच (SGOT, SGPT, ALP आदि) की जाती है।
2. अल्ट्रासाउंड: यह लिवर में फैट की मात्रा दिखाता है।
3. CT स्कैन या MRI: विस्तृत जानकारी के लिए उपयोग किया जाता है।
4. फाइब्रोस्कैन: यह लिवर की कठोरता और फैट की मात्रा बताता है।
5. लिवर बायोप्सी (जरूरत पड़ने पर): इससे लिवर डैमेज की गंभीरता का आकलन किया जा सकता है।
फैटी लिवर का उपचार
अभी तक फैटी लिवर के लिए कोई विशेष दवा नहीं है, लेकिन इसे जीवनशैली में बदलाव के जरिए काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जानिए कुछ प्रमुख उपचार…
वजन घटाना
7-10% वजन कम करने से लिवर में जमा वसा में काफी कमी आ सकती है। यह धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से किया जाना चाहिए।
संतुलित आहार लेना
अधिक फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, सब्जियां, ओट्स, साबुत अनाज शामिल करें। ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड से बचें। फ्रक्टोज युक्त ड्रिंक्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और मिठाइयों से दूरी बनाएं। मछली (विशेष रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त), ड्राई फ्रूट्स और हेल्दी फैट्स का सेवन करें।
नियमित व्यायाम
सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि (जैसे चलना, दौड़ना, योग) करें। एक्सरसाइज लिवर फैट को कम करने में प्रभावी होती है।
शराब से परहेज
अल्कोहॉलिक फैटी लिवर से ग्रसित लोगों को शराब पूरी तरह से छोड़नी चाहिए।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करें..
डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों को नियमित जांच करवानी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं लेनी चाहिए।
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