father kills daughter neet low marks sangli june 2025: पढ़ाई का दबाव बना मौत की वजह!
father kills daughter neet low marks sangli june 2025: सांगली : महाराष्ट्र के सांगली जिले से दिल को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। 17 वर्षीय साधना भोंसले की उसके ही पिता ने हत्या कर दी—वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उसके NEET मॉक टेस्ट में कम नंबर आए थे।
आरोपी पिता धोंडीराम भोंसले, एक स्थानीय स्कूल में प्रिंसिपल हैं। यह घटना देश में शैक्षणिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और पेरेंटल एंगर को लेकर गहरे सवाल खड़े करती है।
🧪 बेटी मेडिकल की तैयारी कर रही थी, 10वीं में 92.60% लाए थे नंबर
साधना पढ़ाई में होनहार थी। 10वीं बोर्ड में उसने 92.60% अंक हासिल किए थे। पिछले एक साल से वह NEET (मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी कर रही थी। लेकिन एक मॉक टेस्ट में अपेक्षाकृत कम अंक आने पर उसके पिता का गुस्सा फूट पड़ा।
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, धोंडीराम ने उसे डंडे से इतनी बुरी तरह पीटा कि साधना को सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे तुरत इलाज के लिए उषाकल हॉस्पिटल, सांगली ले जाया गया, जहां 22 जून को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
👩👧 मां की शिकायत पर हत्या का केस दर्ज, पिता गिरफ्तार
घटना के बाद साधना की मां ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
FIR में कहा गया:
“मेरे पति ने मेरी बेटी को मारा, क्योंकि वो टेस्ट में अच्छे नंबर नहीं ला सकी।”
पुलिस ने IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट ने उन्हें 24 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
❓ सवाल जो अब देश पूछ रहा है…
- क्या NEET जैसी परीक्षाएं बच्चों पर असहनीय मानसिक दबाव बना रही हैं?
- क्या शिक्षक, यहां तक कि स्कूल प्रिंसिपल तक, इतने असंवेदनशील हो गए हैं?
- एक होनहार बेटी को क्या सिर्फ नंबरों की वजह से इतनी क्रूरता झेलनी पड़ी?
🧠 मनोवैज्ञानिकों की राय: “यह सिर्फ हत्या नहीं, सिस्टम की विफलता है”
दिल्ली के प्रसिद्ध मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रचना बंसल कहती हैं:
“बच्चों पर नंबरों का इतना दबाव देना, और विफलता को शर्म की तरह देखना हमारी शिक्षा प्रणाली की सबसे खतरनाक कमियों में से एक है।”
⚠️ पिछले ऐसे केस जो सुर्खियों में रहे
- कोटा (राजस्थान): हर साल NEET-आस्पिरेंट्स के आत्महत्या के केस दर्ज होते हैं।
- दिल्ली, 2023: IIT की तैयारी कर रहे छात्र ने आत्महत्या कर ली—टेस्ट में बार-बार असफल होने से तनाव था।
- 2024, पुणे: एक पिता ने बेटे को हॉस्टल से घर बुलाकर मारा—NEET दो बार क्लियर नहीं किया था।
📌 क्या अब समय आ गया है कि हम “नंबर” से ज़्यादा “मानवता” को प्राथमिकता दें?
शिक्षा का असली उद्देश्य क्या है—अंक, डिग्री, या चरित्र निर्माण?
इस घटना ने न सिर्फ एक होनहार छात्रा की जान ली, बल्कि यह देश के लाखों माता-पिता, छात्रों और शिक्षकों के लिए चेतावनी है कि कड़ी मेहनत के नाम पर क्रूरता को कभी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
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