Farmers Protest in Bhopal : भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। भावांतर भुगतान योजना के तहत सोयाबीन की खरीदी को लेकर किसान असंतुष्ट हैं और उन्होंने कहा,कि यह उनकी मेहनत और लागत को पूरा नहीं कर पा रही। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अंजना का कहना है कि इस बार प्रदेश का किसान आंदोलन के लिए तैयार है।
भावांतर योजना
भावांतर योजना को मध्यप्रदेश सरकार ने फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार भाव के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए लागू किया था। जब बाजार भाव समर्थन मूल्य से नीचे चले जाते हैं, तो सरकार किसानों को अंतर राशि देने का वादा करती है।
किसानों का कहना है कि यह योजना व्यावहारिक रूप से उनके लिए लाभकारी नहीं साबित हो रही है। समय पर भुगतान नहीं होने, खरीदी में पारदर्शिता की कमी और दलालों की भूमिका के कारण किसान गहरी समस्या का सामना कर रहे हैं।
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सोयाबीन किसानों की समस्या
मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां लाखों किसान अपनी आजीविका सोयाबीन की खेती से जोड़ते हैं।
हाल के वर्षों में मौसम की अनियमितता और बार-बार आई बेमौसम बारिश ने पैदावार घटा दी है।
लागत बढ़ते जाने के बावजूद मंडियों में उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
भावांतर योजना के तहत मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है और कई मामलों में भुगतान महीनों तक टल जाता है।
इसी कारण किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है और वह आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
किसानों में आक्रोश
किसान संगठनों ने तय किया है कि वह भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इसमें हजारों किसान शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
किसान अपने ट्रैक्टर और बैलगाड़ियों के साथ भोपाल पहुंच सकते हैं।
मुख्य मांग यह है कि सरकार भावांतर योजना के बजाय सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गारंटी दे।
किसानों ने कहा, कि योजना के नाम पर केवल आंकड़ों का खेल चल रहा है और वास्तविक लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है।
आंजना का बयान
कांग्रेस नेता अंजना ने कहा है कि प्रदेश का किसान अब जाग चुका है और इस बार आर-पार का आंदोलन होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक सहयोग चाहिए।
अंजना का मानना है कि जब तक सरकार सभी किसानों से सीधे और समय पर एमएसपी पर खरीदी नहीं करेगी, तब तक राज्य में कृषि संकट बना रहेगा।
किसानों की प्रमुख मांगें
सभी खरीदी केंद्रों पर सोयाबीन की सीधी खरीदी एमएसपी पर हो।
भावांतर योजना में पारदर्शिता लाई जाए और बकाया राशि तुरंत दी जाए।
सरकार लागत का वैज्ञानिक आकलन कर समर्थन मूल्य को बढ़ाए।
मौसम आपदा से प्रभावित किसानों को विशेष राहत पैकेज मिले।
भावांतर योजना में सुधार या उसके विकल्प की मांग करते हुए किसान भोपाल में मजबूत आवाज उठाने को तैयार हैं। सरकार अगर समय पर ठोस कदम नहीं उठाती, तो इस आंदोलन से प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
