Famous Nag temples in India: भारतीय संस्कृति के अनुसार साल में एक बार नागों का दिन आता है, जिसे नाग पंचमी कहते है, हिंदू धर्म में इस पर्व को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस भक्तगढ़ भगवान शिव के साथ – साथ नाग देवता की पूजा करते हैं, उन्हें दूध पिलाते है।
कहा जाता है कि नाग देवता की पूजा करने से जीवन के सारे दोष खत्म हो जाते हैं। भारत के कई जगहों में दरवाजे के पास दीवार में नाग देवता की आकृति को गोबर से बनाते हैं, घर में ही उनकी पूजा करते हैं।
भारत में कई ऐसे चमत्कारिक नाग मंदिर हैं, जहां जाने मात्र से काल सर्प दोष, पितृ दोष और नकारात्मक प्रभावो से मुक्ति मिलती है तो आइए जानते हैं 5 ऐसे प्रसिद्ध मंदिरो के बारे में…
नाग वासुकी मंदिर, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
नाग वासुकी मंदिर प्रयागराज के दारागंज इलाके में गंगा नदी के किनारे स्थित है और यह नागों के राजा वासुकी को समर्पित है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस मंदिर में श्रृद्धा से दर्शन करता है और नाग पंचमी या श्रावण मास में जल या दूध का अभिषेक करता है, उसे काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है। मंदिर का मुख त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती) की ओर होने से इसे बेहद पवित्र माना जाता है। यहां नियमित पूजा से जीवन के संकट, रोग और ग्रहदोष समाप्त हो जाते हैं।
View this post on Instagram
मन्नारसाला श्री नागराजा मंदिर, हरिपाड (केरल)
केरल के हरिपाड क्षेत्र में घने जंगलों के बीच बसा यह मंदिर नागराज को समर्पित है। मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा करने से संतान संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और परिवार में समृद्धि आती है। यहां 30,000 से अधिक नागों की मूर्तियाँ स्थापित हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं। यह भी माना जाता है कि यहां पूजा करने से जीवन में भय, विष, और पापों का नाश होता है और वंश वृद्धि होती है। खास बात यह है कि मंदिर की पूजा एक महिला पुजारी द्वारा करवाई जाती है, जो दक्षिण भारत की परंपरा में दुर्लभ है।

कुक्के सुब्रमण्य मंदिर, दक्षिण कन्नड़ (कर्नाटक)
यह मंदिर भगवान सुब्रमण्य को समर्पित है, जिन्हें नागों का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि यहां विशेष रूप से किए जाने वाले अनुष्ठान जैसे सर्प संस्कार, नाग दोष निवारण पूजा और अश्लेषा बली पूर्वजों के श्रापों से मुक्ति दिलाते हैं।
View this post on Instagram
यह भी माना जाता है कि इस मंदिर की पूजा करने से ग्रह दोष, संतानहीनता, और पारिवारिक कष्टों का नाश होता है। चारों ओर की प्राकृतिक सुंदरता और मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा इसे विशेष बनाती है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर को साल में केवल एक बार – नाग पंचमी के दिन दर्शन के लिए खोला जाता है। यह मंदिर भगवान शिव, माता पार्वती और उनके ऊपर फन फैलाए नाग देवता की मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।

मान्यता है कि इस दिन यहां दर्शन करने से जीवन में नाग दोष, भय, शारीरिक रोग और ग्रह पीड़ाएं समाप्त होती हैं। एक दिन के लिए खुलने वाला यह मंदिर अपने आप में दुर्लभ आध्यात्मिक अनुभव का स्रोत है।

नाग मंदिर, पटनीटॉप (जम्मू-कश्मीर)
जम्मू-कश्मीर के पटनीटॉप की हरी-भरी पहाड़ियों में स्थित यह करीब 600 साल पुराना मंदिर नाग देवता को समर्पित है। कहा जाता है कि इस मंदिर में सावन और नाग पंचमी के अवसर पर की गई पूजा से मन की शांति, रोगों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। यहां की शांत वादियों और गूंजते मंत्रोच्चार से भक्तों को आत्मिक सुख और दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से नाग देवता की आराधना करते हैं, उनके जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

