Eyebrow Threading Infection Risk: आजकल फैशन और खूबसूरती की चाह में आईब्रो थ्रेडिंग एक आम ब्यूटी रूटीन बन गया है। महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी सैलून और ब्यूटी पार्लर में जाकर आईब्रो शेप करवाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार-बार आईब्रो बनवाना या थ्रेडिंग करवाना सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है?
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विशेषज्ञों का कहना है कि, आईब्रो बनवाने से स्किन इंफेक्शन, एलर्जी, हेपेटाइटिस बी, एचआईवी और स्टैफ संक्रमण तक का खतरा हो सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर आईब्रो थ्रेडिंग से जुड़ी समस्याएं क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।

आईब्रो थ्रेडिंग से क्यों होता है खतरा?
आईब्रो थ्रेडिंग में स्किन पर धागे की रगड़ और खींचाव से रोमछिद्र (pores) खुल जाते हैं। इस दौरान अगर इस्तेमाल किया गया धागा, चिमटी या अन्य उपकरण संक्रमित हों तो बैक्टीरिया और वायरस आसानी से स्किन में प्रवेश कर सकते हैं।
1. संक्रमित धागा – कई बार पार्लर में एक ही धागे का इस्तेमाल कई ग्राहकों पर किया जाता है। इससे खतरनाक बीमारियां फैल सकती हैं।
2. असुरक्षित उपकरण – चिमटी, ब्रश या कैंची यदि ठीक से स्टरलाइज न किए जाएं तो उनमें बैक्टीरिया और वायरस पनपते हैं।
3. खुले रोमछिद्र – थ्रेडिंग के बाद स्किन के छिद्र खुले रहते हैं। इस दौरान धूल, पसीना या मेकअप से इंफेक्शन जल्दी फैलता है।

थ्रेडिंग से होने वाले संभावित इंफेक्शन…
बैक्टीरियल इंफेक्शन (Staph Infection)..
स्टैफ नामक बैक्टीरिया से संक्रमण होने पर आईब्रो के आसपास लाल दाने, फुंसी और दर्द हो सकता है। गंभीर मामलों में पस (मवाद) भी बनने लगता है।
वायरल इंफेक्शन…
असुरक्षित और संक्रमित उपकरणों से थ्रेडिंग कराने पर हेपेटाइटिस बी और एचआईवी जैसे गंभीर संक्रमण फैल सकते हैं। हालांकि इसके मामले कम देखने को मिलते हैं, लेकिन जोखिम हमेशा बना रहता है।
फंगल इंफेक्शन…
नमी और गंदगी की वजह से आईब्रो के आसपास फंगल इंफेक्शन हो सकता है, जिससे खुजली और लाल चकत्ते दिखाई देते हैं।
स्किन एलर्जी और जलन…
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को थ्रेडिंग के बाद अक्सर खुजली, जलन और सूजन की समस्या हो जाती है।

थ्रेडिंग के बाद दिखने वाले लक्षण…
अगर थ्रेडिंग के कुछ घंटों बाद या अगले दिन ये लक्षण दिखें तो समझें कि इंफेक्शन हो सकता है:-
1. आईब्रो के आसपास लालिमा और सूजन।
2. खुजली या जलन होना।
3. फुंसी या छोटे-छोटे दाने निकलना।
4. लगातार दर्द या पस निकलना।
5. आंखों के पास सूजन या भारीपन।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
1. जिनकी स्किन बहुत सेंसिटिव है।
2. जिन्हें पहले से पिंपल, एक्ने या डर्मेटाइटिस की समस्या है।
3. डायबिटीज के मरीज या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग
4. जो बार-बार और जल्दी-जल्दी थ्रेडिंग करवाते हैं
बचाव के सही उपाय…
सीलबंद धागा इस्तेमाल करें…
हमेशा पार्लर में नया और पैक्ड धागा खुलवाएं। इस्तेमाल किया हुआ धागा बिल्कुल न लें।
उपकरणों की सफाई जांचें…
चिमटी, ब्रश और कैंची को पार्लर स्टाफ से सैनिटाइज कराने की पुष्टि करें।
मेकअप से परहेज करें…
थ्रेडिंग के बाद कम से कम 10–12 घंटे तक आईब्रो के आसपास कोई भी मेकअप या केमिकल प्रोडक्ट न लगाएं।
चेहरे को ठंडे पानी से धोएं…
थ्रेडिंग के बाद ठंडे पानी से चेहरा धोने से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और इंफेक्शन का खतरा कम होता है।
एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं…
डॉक्टर की सलाह से एंटीसेप्टिक क्रीम या एलोवेरा जेल लगाने से स्किन को आराम मिलता है और संक्रमण से बचाव होता है।
बार-बार छूने से बचें…
थ्रेडिंग के बाद हाथों से आईब्रो को बार-बार छूने से बैक्टीरिया स्किन पर पहुंच सकते हैं।
घरेलू उपाय…
अगर थ्रेडिंग के बाद हल्की जलन या लालिमा हो तो ये नुस्खे मदद कर सकते हैं:-
1. एलोवेरा जेल – सूजन और खुजली कम करता है।
2. बर्फ की सिकाई – सूजन और दर्द में राहत देती है।
3. गुलाबजल – स्किन को ठंडक और फ्रेशनेस देता है।
4. हल्दी का लेप – एंटीबैक्टीरियल गुणों से संक्रमण रोकता है।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
1. अगर आईब्रो के पास पस निकलने लगे
2. लगातार तेज दर्द और जलन बनी रहे
3. सूजन आंखों तक फैल जाए
4. 2–3 दिनों में समस्या कम न हो
ऐसे में तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ) से संपर्क करें और सही इलाज लें।
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