Eye Twitching Meaning: अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है कि अचानक एक आंख की पलक फड़कने लगती है। और लोग इस पर अपने – अपने मत देने लगते हैं। कुछ लोग इसे सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया मानते हैं, तो कुछ इसे शुभ या अशुभ संकेत की तरह देखने लगते हैं। भारत जैसे देश में जहां आध्यात्म, मान्यताएं और परंपराएं जीवन का हिस्सा हैं, वहां आंख फड़कने को लेकर भी कई तरह की धारणाएं प्रचलित हैं।
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धार्मिक मान्यताएं: शुभ और अशुभ संकेतों का रहस्य…
भारतीय संस्कृति में आंख फड़कने को केवल शरीर की प्रतिक्रिया नहीं माना गया, बल्कि इसे एक आगामी घटना का संकेत समझा गया है। यह मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों, लिंग और आंख के हिस्से के आधार पर भिन्न होती हैं –
1. दाहिनी आंख फड़कना (पुरुष) – शुभ संकेत माना जाता है। कहते हैं कि कोई अच्छी खबर मिलने वाली है या काम में सफलता मिलेगी।
2. बाईं आंख फड़कना (पुरुष) – अशुभ माना गया है। इससे चिंता या हानि की आशंका व्यक्त की जाती है।
3. बाईं आंख फड़कना (महिला) – शुभ मानी जाती है। इसे सुखद समाचार या आर्थिक लाभ से जोड़ा जाता है।
4. दाहिनी आंख फड़कना (महिला) – कई स्थानों पर इसे अशुभ संकेत माना गया है।
कुछ परंपराएं आंख के विशेष हिस्सों से भी संकेत निकालती हैं, जैसे पलक, भौं या आंख के कोने का फड़कना।

जब एक साथ फड़कें दोनों आंखें?
कई बार ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति की दोनों आंखें एक साथ फड़कने लगती हैं, जिससे लोग भ्रम में पड़ जाते हैं कि यह शुभ संकेत है या अशुभ।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यदि दोनों आंखें एक साथ फड़कने लगें, तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि जल्द ही आपकी किसी पुराने दोस्त या लंबे समय से न मिले रिश्तेदार से मुलाकात हो सकती है। यह संकेत पुरुष और महिला दोनों के लिए समान रूप से मान्य होता है। यह कोई नकारात्मक या अशुभ संकेत नहीं है, बल्कि इसे सकारात्मक अनुभव की संभावना के रूप में देखा जाता है।
वैज्ञानिक कारण…
डॉक्टरों के अनुसार, आंख फड़कने को Eyelid Twitching या Myokymia कहा जाता है। यह एक मांसपेशियों का अस्थायी और अनैच्छिक संकुचन होता है, जो निम्न कारणों से हो सकता है –
1. थकान और नींद की कमी।
2. तनाव या अत्यधिक मानसिक दबाव।
3. आंखों पर जोर देना – जैसे मोबाइल या लैपटॉप की लंबी स्क्रीन टाइम।
4. कैफीन या शराब का अधिक सेवन।
5. आंखों में ड्राइनेस या एलर्जी।
यह फड़कना आमतौर पर कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक चलता है और फिर अपने आप बंद हो जाता है। यदि यह बार-बार और लंबे समय तक हो, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित होता है।
आंख फड़कना और अंधविश्वास: विज्ञान बनाम मान्यता…
जहां एक ओर आंख फड़कना एक सामान्य और अस्थायी स्वास्थ्य स्थिति है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कई अंधविश्वास भी समाज में गहराई से जुड़े हुए हैं। कई बार लोग इन मान्यताओं के चलते डर या खुशी का अनुभव करने लगते हैं, बिना इस बात की जांच किए कि असल कारण क्या है।
अंधविश्वास के उदाहरण…
1. आंख फड़की तो लोग सफर रद्द कर देते हैं।
2. कुछ लोग इसे देखकर कार्य प्रारंभ नहीं करते।
3. कई घरों में इसे लेकर विशेष पूजा-पाठ किया जाता है।
4. आंख फड़कने को किसी “बुरी नजर” या “ऊर्जा परिवर्तन” से जोड़कर देखा जाता है।
ऐसे में जरूरत है जागरूकता की। लोगों को समझना चाहिए कि आंख फड़कना अधिकतर मामलों में तनाव या थकान का संकेत होता है और इसे आधार बनाकर कोई बड़ा फैसला लेना सही नहीं।
