european car makers india: नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते से यूरोपीय कार निर्माताओं को भारतीय बाजार में विस्तार की नई उम्मीद जरूर मिली है, लेकिन रास्ता अब भी आसान नहीं है। भारतीय कार बाजार में Suzuki Motor, Tata Motors और Mahindra जैसे घरेलू व एशियाई ब्रांडों का दबदबा बना हुआ है।
EU-India समझौता क्या बदलेगा?
भारत और European Union के बीच मंगलवार को हस्ताक्षर होने वाले व्यापार समझौते के तहत यूरोप में बनी कारों पर आयात शुल्क को 110% से घटाकर 40% किया जाएगा। यह कदम Volkswagen और Renault जैसे यूरोपीय ब्रांडों के लिए भारत के विशाल बाजार के दरवाजे और खोल सकता है।
लेकिन बाजार पर अब भी घरेलू कंपनियों का कब्जा
विश्लेषकों का कहना है कि टैरिफ कटौती के बावजूद यूरोपीय कंपनियों के लिए वॉल्यूम सेगमेंट में उतरना मुश्किल रहेगा।भारत में छोटे, किफायती और भरोसेमंद वाहनों की मांग ज्यादा है, जहां मारुति सुजुकी वैगन-आर जैसे मॉडल लंबे समय से लोकप्रिय हैं। जर्मन ऑटो रिसर्च ग्रुप CAM के प्रमुख स्टीफन ब्रात्ज़ेल के मुताबिक,
यूरोप से निर्यात फिलहाल प्रीमियम कारों तक ही सीमित रहेगा। भारत में सस्ती और टिकाऊ कारों का बाजार है, जिसे सुजुकी और हुंडई बेहतर समझते हैं।
यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी 3% से भी कम
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कार बाजार में यूरोपीय कार निर्माताओं की हिस्सेदारी 3% से कम है। इसके मुकाबले सुजुकी, टाटा और महिंद्रा की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई है। हालांकि सीमित उत्पादन क्षमता और सालाना हजारों कारों की बिक्री के साथ, यूरोपीय ब्रांडों के पास पिछले दशक में खोई बाजार हिस्सेदारी वापस पाने की गुंजाइश जरूर है।
लक्जरी सेगमेंट को मिलेगा ज्यादा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती से सबसे ज्यादा फायदा लक्जरी कार निर्माताओं को होगा।
- Porsche
- Mercedes-Benz
- BMW
जैसे ब्रांड भारत में अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं। वारबर्ग रिसर्च के विश्लेषक फैबियो होल्शेर के अनुसार, 40% टैरिफ लक्जरी सेगमेंट को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा, हालांकि मुनाफे में बढ़ोतरी में समय लगेगा।
भारत बना नया ग्रोथ मार्केट
अमेरिका में ऊंचे टैरिफ और चीन में मूल्य युद्ध के चलते कई वैश्विक ऑटो कंपनियां भारत को नए विकास बाजार के रूप में देख रही हैं।भारत पहले ही दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है और अनुमान है कि 2030 तक यहां वार्षिक बिक्री 60 लाख वाहनों तक पहुंच सकती है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार ने 15,000 यूरो से अधिक कीमत वाली सीमित संख्या में आयातित कारों पर टैरिफ और घटाने पर भी सहमति जताई है, जिसे भविष्य में 10% तक लाया जा सकता है।
