Maoist insurgency decline India : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण करने वाले 210 नक्सलियों को संगठन ने गद्दार बताया है। यह संख्या नक्सलियों के मुख्यधारा में लौटने का एक बड़ा संकेत थी, जिसमें कई वरिष्ठ नेता और सक्रिय सदस्य शामिल थे। इनके पास से 153 हथियार भी पुलिस के सुपुर्द किए गए।
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में पुरुष और महिलाएं शामिल थीं। इनमें से कई के ऊपर लाखों रुपए के इनाम भी घोषित थे। इस कार्रवाई को सुरक्षा बलों की सक्रियता और सतर्कता का नतीजा माना जा रहा है, जिससे नक्सलियों की हरकतें कमजोर पड़ रही हैं।
संगठन में विरोधाभास
हालांकि संगठन के इस बयान ने नक्सल आंदोलन में विरोधाभास को जन्म दिया है। संगठन की सलाह और निर्णय उनके बीच एक खाई पैदा कर रही है, जो आंदोलन की मजबूती के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। वह मुख्यधारा में लौटने को लेकर उलझन में हैं।
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सरेंडर के बाद की चुनौतियां
सरकार ने इन नक्सलियों के पुनर्वास के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, जिनमें कौशल विकास, रोजगार के अवसर प्रदान करना और समाज में शामिल होना है। बस्तर के आईजी सुंदरराजन पी. ने इसे नक्सलवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत बताया है, जिससे क्षेत्र में शांति और विकास की उम्मीदें बढ़ी हैं।
सर्च ऑपरेशन जारी
सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन से नक्सलियों के लिए छिपने की जगह कम होती जा रही है, जिससे अधिक से अधिक नक्सली हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर रहे हैं। इस प्रक्रिया से वर्ष 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने की योजना को बल मिला है।
नक्सलियों का जल्द होगा सैफाया
210 नक्सलियों के खिलाफ संगठन के बयान और नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबरों ने छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या पर नई बहस छेड़ दी है। यह दर्शाता है कि प्राकृतिक और राजनीतिक दबाव दोनों ही आंदोलन को प्रभावित कर रहे हैं। भविष्य में यह देखना होगा कि इस विरोधाभास का समाधान कैसे निकाला जाता है और क्षेत्र में शांति कैसे लाई जाती है।
