मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में लोग हाथियों के उत्पात से परेशान हैं। ब्यौहारी क्षेत्र में 19 हाथियों का दल लगातार गांवों में घूम रहा है और खेतों, खलिहानों, बाड़ियों तथा मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं क्योंकि रात होते ही यह झुंड गांवों का रूख करता है। लंबे समय से जारी इस समस्या ने स्थानीय लोगों का जीवन कठिन बना दिया है।
किसानों की मेहनत पर पानी
किसानों को काफी नुकसान हो रहा है धान और मक्का की फसल पकने की स्थिति में है, लेकिन हाथियों के खलिहानों और खेतों में घुसने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। कई जगहों पर किसानों ने बताया कि पूरे-पूरे खेत चंद घंटों में बरबाद हो गए हैं। यह उनकी सालभर की मेहनत और आजीविका पर गहरी चोट है।
मकानों और बस्तियों में नुकसान
हाथियों का यह दल केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों की बस्तियों में भी घुसपैठ कर रहा है। कई घरों की दीवारें तोड़ी गईं, अनाज के भंडार नष्ट हुए और कुछ जगह घरेलू सामान को भी क्षति पहुंचाई गई। लोग घरों में सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे हैं और सामूहिक रूप से रातभर जागकर निगरानी कर रहे हैं।
read more : नवरात्रि-दशहरा से पहले हैदरगढ़ में शांति समिति की बैठक.. त्यौहारों पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर!
प्रशासन और वन विभाग की चुनौती
वन विभाग और प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। हाथियों के झुंड को नियंत्रित करना आसान नहीं होता, खासकर जब उनकी संख्या अधिक हो।
वन विभाग ने चौकसी बढ़ाई है और लगातार दल गांवों में गश्त कर रहा है। ग्रामीणों को भी सतर्क रहने और अकेले हाथियों के नजदीक नही जाने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह झुंड ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगलों से भटककर यहां आया है।
दहशत और असुरक्षा का माहौल
गांवों में इस समय दहशत का वातावरण है। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कई किसान अपनी फसल बचाने के लिए रातभर खेतों में डेरा डाल रहे हैं। महिलाएं और बच्चे घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं। हर ओर भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
समाधान की तलाश
जंगलों और हाथियों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा से ही संभव है। जब तक जंगलों पर दबाव कम नहीं होगा और हाथियों के भोजन-पानी की व्यवस्था नहीं होगी, तब तक उनके गांवों में घुसने की घटनाएं जारी रह सकती हैं।
फिलहाल प्रशासन राहत और निगरानी के उपाय कर रहा है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
शहडोल और विशेषकर ब्यौहारी क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों हाथियों के कहर से त्रस्त हैं। फसलों का नुकसान, घरों की बर्बादी और जानमाल को खतरे की समस्या लगातार बनी रहती है वही प्रशासन व वन विभाग को मिलकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी और हाथियों के इस झुंड को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस खदेड़ने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।
