EC का पलटवार- वोट चोरी के आरोपों पर दिया करारा जवाब

CEC ज्ञानेश कुमार बोले: चुनाव आयोग किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में नहीं
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल लोकतंत्र और संविधान का अपमान है। बिना सबूत लगाए गए आरोप जनता को गुमराह करते हैं और लोकतंत्र की नींव कमजोर करते हैं। EC ने दावा किया कि वोटर लिस्ट में किसी भी गड़बड़ी पर समय रहते आपत्ति जताने की प्रक्रिया मौजूद है, जिसे नजरअंदाज किया गया।
हमारे लिए कोई पक्ष-विपक्ष नहीं
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वह सभी राजनीतिक दलों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करता है। आयोग की पूरी चुनाव प्रक्रिया डिसेंट्रलाइज्ड और ट्रांसपेरेंट है जिसमें करोड़ों लोगों की भागीदारी होती है।
EC ने राहुल गांधी के आरोपों पर क्या कहा?
| राहुल गांधी का आरोप | EC का जवाब |
|---|---|
| वोट चोरी हो रही है | पारदर्शी प्रक्रिया में वोट चोरी मुमकिन नहीं |
| BJP के साथ मिलकर चुनाव चुराया | सभी पार्टियों को समान मौका, लिस्ट साझा होती है |
| वोटर लिस्ट में फर्जी नाम | सूची BLA-BLO द्वारा सत्यापित, आपत्ति का समय दिया गया |
| EC पक्षपाती है | हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले, डराने से नहीं डरते |
EC की प्रक्रिया: कैसे बनती है वोटर लिस्ट?
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सभी पार्टियों से साझा की जाती है। बीएलओ और बीएलए (पार्टी प्रतिनिधि) मिलकर सूची सत्यापित करते हैं।मतदाता और राजनीतिक दल आपत्ति दाखिल कर सकते हैं। मतदान केंद्रवार सूची उम्मीदवारों को दी जाती है। मतदान के दिन पोलिंग एजेंट आपत्ति उठा सकते हैं। चुनाव के बाद भी 45 दिन तक कोर्ट में याचिका दायर की जा सकती है।
#WATCH | Delhi: Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar says, “The doors of the Election Commission are always open for everyone equally. At the ground level, all the voters, all the political parties and all the booth-level officers are working together in a transparent… pic.twitter.com/1R1l3dDSPG
— ANI (@ANI) August 17, 2025
कितनी बड़ी है ये प्रक्रिया?
1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी, 10 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट,20 लाख से ज्यादा पोलिंग एजेंट, हर सीट पर कई स्तर की निगरानी, CEC बोले: इतने स्तरों पर गुप्त रूप से वोट चोरी करना असंभव है।
मतदाताओं की गोपनीयता का उल्लंघन?
CEC ने आलोचना की कि बिना अनुमति मतदाताओं की तस्वीरें सार्वजनिक की गईं। EC ने यह भी पूछा कि क्या हमें भी इन मतदाताओं के सीसीटीवी फुटेज जारी करने चाहिए?
SIR प्रक्रिया क्या है और अब क्या होगा?
SIR (Statewide Intensive Revision) के तहत बिहार में वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया चल रही है। 15 दिन अब भी बाकी हैं राजनीतिक दलों और मतदाताओं से अपील की गई है कि त्रुटियाँ रिपोर्ट करें।
CEC का संदेश मतदाताओं को:
18 साल या उससे ज्यादा उम्र का हर नागरिक वोटर बने और लोकतंत्र को मजबूत करे।
राजनीतिक संकेत
EC की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के गंभीर आरोपों के जवाब में आई है। चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाकर अपनी निष्पक्षता की छवि को बचाने की कोशिश की है। विपक्ष के लिए यह चेतावनी भी है कि बिना सबूत के आरोप लगाने से जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता।
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