
तूतनखामेन की कब्र के साथ लौटी 3,000 साल पुरानी दास्तान
egypt grand museum: मिस्र ने एक ऐसा अध्याय खोला है, जिसमें इतिहास सांस लेता है और रहस्य की गंध अब भी हवा में महसूस की जा सकती है।
गीजा के विशाल पिरामिडों के पास अब दुनिया का सबसे बड़ा संग्रहालय “ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम (GEM)” आम जनता के लिए खोल दिया गया है।
इसका उद्घाटन राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी ने किया, जहां दुनिया भर के नेता और इतिहास प्रेमी मौजूद थे।
करीब 1 अरब डॉलर की लागत से बना यह म्यूजियम न सिर्फ वास्तुकला का चमत्कार है, बल्कि मानव सभ्यता की आत्मा को सहेजने की कोशिश भी है।
केंद्र में है “बॉय किंग” तूतनखामेन की रहस्यमयी कब्र
म्यूजियम की सबसे बड़ी आकर्षण है राजा तूतनखामेन की कब्र, जो करीब 3,000 साल तक रेत और चट्टानों के नीचे दबी रही। साल 1922 में ब्रिटिश पुरातत्वविद हॉवर्ड कार्टर ने इसे खोज निकाला था जब पहली बार कब्र का ताला तोड़ा गया, तब इतिहास को जैसे नई सांस मिली। उसमें 5500 से अधिक वस्तुएं मिलीं सुनहरे मुखौटे, शाही आभूषण, ताबूत और रहस्यमयी मूर्तियां। अब पहली बार ये सारी वस्तुएं एक ही जगह, इस म्यूजियम में, आम लोगों के सामने प्रदर्शित की गई हैं।
तूतनखामेन सिर्फ 9 साल की उम्र में मिस्र का फराओ (राजा) बना था। लेकिन उसकी जिंदगी उतनी ही छोटी थी जितनी चमकदार सिर्फ 19 साल की उम्र में उसकी मौत हो गई। इतिहासकार अब भी यह जानने की कोशिश में हैं कि उसकी मौत बीमारी, साजिश या किसी श्राप का नतीजा थी।
egypt grand museum: कब्र खोजने वालों की रहस्यमयी मौतें
कहते हैं, तूतनखामेन की कब्र खोलने के बाद मौतों की एक लंबी श्रृंखला शुरू हुई। सबसे पहले ब्रिटिश लॉर्ड कार्नार्वन, जिन्होंने इस अभियान को फंड किया था, अप्रैल 1923 में रहस्यमयी हालात में मरे। उसी रात काहिरा की बिजली गुल हो गई, और इंग्लैंड में उनकी पालतू कुत्ती अचानक मर गई। उनके बाद कुल पांच लोगों की असामान्य मौतें दर्ज की गईं
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आर्चिबाल्ड रीड, जिन्होंने ममी का एक्स-रे किया था, अज्ञात बीमारी से मरे।
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ह्यू एवेलिन व्हाइट, खुदाई टीम के सदस्य, आत्महत्या कर ली और लिखा “मैं श्राप के अधीन हूं।”
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आर्थर माचेन्थ, कार्टर की टीम में थे, अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने से मौत हुई।
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सर ली ब्रूस, कब्र का दस्तावेज तैयार कर रहे थे, रहस्यमय तरीके से मरे।
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जॉर्ज गोल्ड, एक अमेरिकी अरबपति, कब्र देखकर लौटे और कुछ ही दिनों में टाइफाइड से मर गए।
इन घटनाओं के बाद मीडिया ने इसे “किंग टट का श्राप” (Curse of the Pharaoh) नाम दिया जो आज भी मिस्र की सबसे चर्चित रहस्यमयी कहानी है।
विज्ञान की नजर में श्राप नहीं, बैक्टीरिया था
हालांकि, 2023 में प्रकाशित जर्नल ऑफ आर्कियोलॉजिकल साइंस की एक रिपोर्ट ने बताया कि मौतों के पीछे कोई श्राप नहीं, बल्कि बैक्टीरिया और फफूंद थे। कब्र की दीवारों पर पाए गए सूक्ष्म जीव कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते थे। इतिहास में फैला डर असल में विज्ञान की अनदेखी का परिणाम था।
म्यूजियम की भव्यता और तकनीकी चमत्कार
ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम में 1 लाख से ज्यादा कलाकृतियां रखी गई हैं। यहां रामसेस द्वितीय की 83 टन वजनी मूर्ति, 4500 साल पुरानी खुफू की नाव, और हजारों साल पुराने फिरौन के खजाने प्रदर्शित हैं। संग्रहालय में 12 थीमैटिक गैलरियां बनाई गई हैं, जो प्रागैतिहासिक काल से लेकर रोमन युग तक की यात्रा कराती हैं। यहां बच्चों के लिए एक मिनी म्यूजियम, रिसर्च सेंटर और अत्याधुनिक संरक्षण लैब भी है।

म्यूजियम का आकार इतना बड़ा है कि इसे 70 फुटबॉल मैदानों के बराबर कहा जा रहा है। गीजा के पिरामिडों से सिर्फ एक मील की दूरी पर बना यह परिसर हर साल 80 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है।
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