
आस्था के नाम पर लूट
भागवत भाई पुजारी ने अपनी शिकायत में कहा कि हरि ओम ऐप जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भगवान द्वारकाधीश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं से भारी-भरकम शुल्क वसूल रहे हैं। यह ऐप कथित तौर पर वीआईपी दर्शन की सुविधा प्रदान करने का दावा करता है, लेकिन इसके पीछे कोई पारदर्शिता नहीं है। पुजारी का कहना है कि यह न केवल मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है, बल्कि सामान्य भक्तों के लिए दर्शन को और जटिल बनाता है। उन्होंने इसे “आस्था के नाम पर काला धंधा” करार दिया और मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
हरि ओम ऐप के खिलाफ शिकायत
पुजारी ने बताया कि उनकी शिकायत के बावजूद द्वारका पुलिस और एसडीएम कार्यालय ने कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने प्रशासन की इस निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा, “जब हम प्रशासन को सूचित करते हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंद लेता है, तो हम क्या समझ सकते हैं?” यह मामला केवल द्वारका तक सीमित नहीं है; हाल ही में विजयवада के कनक दुर्गा मंदिर में भी वीआईपी दर्शन के नाम पर अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। इससे साफ है कि मंदिरों में ऐसी अवैध गतिविधियां देश के अन्य हिस्सों में भी चल रही हैं।

VIP Darshan Scam: ब्राह्मण समुदाय की अपील
एक ब्राह्मण के रूप में, भागवत भाई ने सरकार और प्रशासन से अपील की कि वे इस तरह के धंधों को तत्काल रोकें। उन्होंने कहा कि मंदिरों में भगवान के दर्शन सभी के लिए समान होने चाहिए और किसी को भी आस्था का व्यापार करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। द्वारकाधीश मंदिर, जो चार धामों में से एक है और भगवान कृष्ण को समर्पित है, देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। ऐसे में, इस तरह की अनैतिक गतिविधियां मंदिर की गरिमा और भक्तों की भावनाओं को चोट पहुंचाती हैं।
तत्काल कार्रवाई की मांग
VIP Darshan Scam: पुजारी और स्थानीय समुदाय ने मांग की है कि हरि ओम ऐप के संचालकों के खिलाफ जांच शुरू की जाए और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, मंदिर प्रशासन को ऐसी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सख्त नियम लागू करने चाहिए। विजयवادا के उदाहरण से प्रेरणा लेते हुए, जहां मंदिर कर्मचारियों के खिलाफ UPI लेनदेन की जांच शुरू की गई थी, द्वारका में भी पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना होगा कि भक्तों की आस्था का शोषण न हो और मंदिरों में दर्शन की प्रक्रिया सुगम व निष्पक्ष रहे।
घनश्यामसिंह वाढेर की रिपोर्ट
