अवैध निर्माणों पर नोटिस
प्रशासन ने अवैध निर्माण करने वालों को कई नोटिस जारी किए थे। इनमें स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने की अपील की गई थी, ताकि जबरन कार्रवाई की नौबत न आए। लेकिन अधिकांश ने अनदेखी की, जिसके परिणामस्वरूप आज बुलडोजर एक्शन हुआ। एसडीएम ने बताया कि ये भवन तीर्थ क्षेत्र के मास्टर प्लान का उल्लंघन कर रहे थे, जो पर्यटकों की सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन के लिए खतरा थे। पीजीवीसीएल की टीम ने बिजली कनेक्शन काटे, जबकि पुलिस ने विरोध रोकने के लिए बैरिकेडिंग की।

तीन स्थानों पर ध्वस्त हुए भवन
कार्रवाई तीन प्रमुख स्थलों पर केंद्रित रही। पहला, बेट द्वारका के बालापार क्षेत्र में 20 से अधिक अवैध धार्मिक संरचनाएं गिराई गईं। दूसरा, ओखा में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड की जमीन पर बने हजरत पंज पीर दरगाह को ध्वस्त किया गया। तीसरा, रुक्मिणी मंदिर के निकट व्यावसायिक भवनों पर बुलडोजर चला। कुल 6652 वर्ग मीटर क्षेत्र मुक्त होने से तीर्थ मार्ग चौड़ा हो गया। बाजार मूल्य 18.3 करोड़ होने के बावजूद, प्रशासन ने इसे सरकारी संपदा का हिस्सा बताया।
Dwarka bulldozer action: माफियाओं में दहशत
कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच चली कार्रवाई ने द्वारका के अतिक्रमण माफियाओं को हिलाकर रख दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ये माफिया तीर्थ यात्रियों के बहाने से व्यावसायिक भवन खड़े कर लाखों की कमाई कर रहे थे। गृह मंत्री हर्ष संघवी ने ट्वीट कर कहा, “कृष्ण की भूमि पर कोई अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं।” इससे पहले जनवरी 2025 में भी 250 से अधिक संरचनाएं ध्वस्त की गई थीं, जो मुस्लिम बहुल क्षेत्रों पर केंद्रित थीं।

सुनवाई की मांग
हालांकि, कार्रवाई से प्रभावित परिवारों ने विरोध जताया। एपीसीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 90% प्रभावित मुस्लिम थे, जो पीढ़ियों से द्वीप पर रहते थे। मत्स्य पालन और नाव मालिकों का कारोबार प्रभावित हुआ है, खासकर सुदर्शन सेतु पुल बनने के बाद। प्रशासन का दावा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण के लिए जरूरी था, क्योंकि तटीय क्षेत्र नशीले पदार्थों की तस्करी का केंद्र बन रहा था। विरोधियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए सुनवाई की मांग की।
तीर्थ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाना
Dwarka bulldozer action: यह कार्रवाई 2022 से चल रहे अभियान का हिस्सा है, जिसमें कच्छ, पोरबंदर और जूनागढ़ में भी तोड़फोड़ हुई। प्रशासन अब मुक्त भूमि पर हरियाली और तीर्थ सुविधाएं विकसित करने की योजना बना रहा है। लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि बिना पुनर्वास के यह सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है।
