दशहरे की आग में जले बुराई के प्रतीक कोटा से कुल्लू तक देश में दिखा अद्भुत उत्सव का रंग
kota dussehra celebration 2025: 2 अक्टूबर 2025 की सुबह जैसे ही सूरज निकला, देश के कोने-कोने में एक ही भावना गूंजने लगी बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव, जिसे हम दशहरा या विजयादशमी के नाम से जानते हैं।
लेकिन इस बार का दशहरा कुछ खास है। कहीं 221 फीट का रावण आसमान को छू रहा है, तो कहीं बारिश ने रावण को झुका दिया। कहीं देवी हिडिम्बा के साथ परंपराएं सजीव हो उठीं, तो कहीं बाजारों में उदासी छा गई। इस पर्व ने हर भाव को छुआ – श्रद्धा, रोमांच, उत्साह और थोड़ा सा मलाल भी।
kota dussehra celebration 2025: कोटा में इतिहास रच गया – 221 फीट ऊंचा रावण
राजस्थान के कोटा शहर में इस साल विश्व का सबसे ऊंचा रावण बनाया गया, जिसकी ऊंचाई 221 फीट है। 44 लाख की लागत से तैयार इस विशाल पुतले ने देशभर की सुर्खियां बटोरीं। यह रावण सिर्फ एक पुतला नहीं, एक प्रतीक बन गया है भारत की सामूहिक आस्था का, जो हर साल यह जताता है कि बुराई कितनी भी ऊंची क्यों न हो, अंत में जलकर राख ही होती है। इस अद्भुत रावण को एशिया और इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
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पटना में टूटा रावण का सिर, लेकिन उत्साह अडिग
kota dussehra celebration 2025बिहार के पटना में गांधी मैदान पर बना 80 फीट ऊंचा रावण पहले ही आकर्षण का केंद्र था। लेकिन जैसे ही तेज बारिश हुई, उसका सिर टूटकर गिर पड़ा। यह दृश्य दिल तोड़ने वाला जरूर था, पर रावण दहन देखने पहुंची भीड़ ने अपने जोश में कोई कमी नहीं आने दी। मुख्यमंत्री खुद रावण वध के लिए उपस्थित रहे। बारिश ने आयोजकों के इरादे नहीं तोड़ेक्योंकि रावण सिर से नहीं, अहंकार से बड़ा होता है।
कुल्लू में देवी हिडिम्बा के साथ हुआ उत्सव का आगाज़
हिमाचल के कुल्लू दशहरा की बात ही अलग है। यहां रावण नहीं जलतायहां शुरू होता है देवता यात्रा का पर्व। जैसे ही देवी हिडिम्बा की शोभायात्रा ढालपुर मैदान में पहुंची, सात दिन के उत्सव की शुरुआत हो गई। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक है, बल्कि हिमाचल की संस्कृति, विरासत और लोक परंपराओं की झलक भी है।
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kota dussehra celebration 2025: देशभर से मिलीं रंग-बिरंगी झलकियां
- दिल्ली: PM मोदी इंद्रप्रस्थ श्री रामलीला में 72 फीट रावण दहन में पहुंचे।
- हरियाणा: पंचकूला में 180 फीट का रावण जलाया गया।
- पश्चिम बंगाल: सिंदूर खेला के रंगों में सजी महिलाएंजहां विदाई में भी शक्ति की पूजा होती है।
- कर्नाटक: मैसूरु में सजीव झांकियों और सजे हाथियों के साथ भव्य परेड।
- असम, यूपी, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश: हर राज्य में अपने-अपने रंग, अपनी परंपराएं।
बारिश ने कुछ जगहों की रौनक छीनी
kota dussehra celebration 2025: रायपुर जैसे शहरों में दशहरा बाजारों की रौनक फीकी रही। बारिश के कारण कारीगरों की मेहनत भीग गई और दुकानों की बिक्री प्रभावित हुई। लेकिन फिर भी उम्मीद जिंदा रही। क्योंकि दशहरा सिर्फ त्योहार नहीं है, यह हर हार के बाद उठ खड़े होने का नाम है।
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