Durga Visarjan 2025: नवरात्रि 2025 के 9 दिन भक्तों की भक्ति और आराधना के बाद आज 2 अक्टूबर यानी विजयादशमी के दिन, मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। दशमी तिथि पर भक्त मां दुर्गा को भावभीनी विदाई देते हैं और मूर्ति के साथ कलश विसर्जन भी किया जाता है। यह मान्यता है कि देवी कैलाश पर्वत लौट जाती हैं और अगले वर्ष फिर से अपनी कृपा बरसाने के लिए वापस आती हैं।
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मूर्ति विसर्जन के समय रखे इन बातों का दें ध्यान…
खंडित मूर्ति का सम्मानपूर्वक विसर्जन…
अगर माता की मूर्ति किसी वजह से खंडित हो गई हो, तब भी उसका विसर्जन पूर्ण विधि – विधान के साथ सम्मानपूर्वक करना चाहिए।
अखंड ज्योति को भूलकर भी न बुझाएं…
नवरात्रि में जलाई गई अखंड ज्योति को विसर्जन से पहले खुद से भूलकर भी न बुझाएं। पूजा समाप्ति के बाद अखंड ज्योति से उसकी बत्ती को अलग निकालकर सुरक्षित रखें। बचा हुआ तेल या घी अगली पूजा या हवन में उपयोग किया जा सकता है।

कलश विसर्जन का विशेष महत्व…
मूर्ति स्थापना के साथ ही कलश की स्थापना भी की जाती है। यह देवी का प्रतीक माना जाता है और इसमें नारियल, आम या अशोक के पत्ते का प्रयोग किया जाता है, साथ ही कलश में जल भरकर रखा जाता है। नवरात्रि के दौरान कलश माता की ऊर्जा और शक्ति का केंद्र माना जाता है।
विसर्जन की विधि…
मूर्ति विसर्जन से पहले कलश की पूजा करना अनिवार्य है। कलश में रखा जल घर के तुलसी के पौधे या किसी पवित्र स्थान पर छिड़कें। नारियल और पत्तियों को विसर्जन स्थल पर प्रवाहित करें। अगर मिट्टी का कलश हो तो नदी में प्रवाहित कर सकते है, यह उसे गंगाजल से शुद्ध कर घर में रखा जा सकता है, जो बेहद शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता और लाभ…
मान्यता है कि यदि मूर्ति और कलश विसर्जन के नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और शक्ति बनी रहती है। यह परिवार को बुराई और नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षित रखता है। इसके साथ ही मां दुर्गा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं।
नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में मां दुर्गा की पूजा, व्रत और भक्ति से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विजयादशमी के दिन मूर्ति और कलश का सही विधि-विधान से विसर्जन करने से न केवल धार्मिक कर्तव्य संपन्न होते हैं, बल्कि यह अगले वर्ष के लिए देवी की कृपा और आशीर्वाद भी सुनिश्चित करता है।

Note – The information in this article is based on traditional beliefs and scriptures. It is meant only for general awareness. We do not claim authenticity of any personal faith or ritual.
