Durga Soren 15th Death Anniversary: झारखंड के निर्माण में अपने अमूल्य योगदान के लिए पहचाने जाने वाले स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की 15वीं पुण्यतिथि को पूरे राज्य में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के नामकुम क्षेत्र में लोवाडीह स्थित दुर्गा सोरेन के स्मारक स्थल पर पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दिन झारखंड के लिए न केवल एक शोक का अवसर है, बल्कि उन बलिदानों और संघर्षों को याद करने का भी मौका है, जिन्होंने झारखंड को एक अलग राज्य के रूप में पहचान दिलाई।
स्व. दुर्गा सोरेन ने झारखंड आंदोलन को दी दिशा
स्व. दुर्गा सोरेन झारखंड आंदोलन के एक ऐसे नायक थे, जिन्होंने दीशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बिहार से अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए अथक संघर्ष किया। उनका जीवन गरीबों, वंचितों, आदिवासियों और शोषित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने न केवल झारखंड आंदोलन को दिशा दी, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के लिए भी अपनी आवाज बुलंद की। उनकी विचारधारा और सिद्धांत आज भी झारखंड के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
झारखण्ड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी, झामुमो के स्तंभ और मेरे अभिभावक आदरणीय दादा स्व दुर्गा सोरेन जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन।
स्व दुर्गा सोरेन अमर रहें!
जय झारखण्ड! pic.twitter.com/qHClBbp87I— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 21, 2025
झारखंड आंदोलन के महान योद्धा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद अपने संबोधन में कहा, “स्वर्गीय दुर्गा सोरेन झारखंड आंदोलन के महान योद्धा, समाजसेवी और क्रांतिकारी थे। उनका जीवन संघर्ष, समर्पण और सेवा का प्रतीक रहा है। वे हमेशा वंचितों और शोषितों की आवाज उठाते रहे। झारखंड की स्थापना में उनका योगदान अमर है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी विचारधारा हमें निरंतर प्रेरित करती है कि हम समाज के हर वर्ग के लिए काम करें और उनके सपनों का झारखंड बनाएं।”
Durga Soren 15th Death Anniversary: आदिवासियों के हक के लिए संघर्ष
इस अवसर पर लोवाडीह में आयोजित कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति, स्थानीय नेता और आम लोग शामिल हुए, जिन्होंने स्व. दुर्गा सोरेन को याद करते हुए उनके योगदान को सराहा। झारखंड आंदोलन के दौरान दुर्गा सोरेन ने न केवल अपनी नेतृत्व क्षमता से लोगों को एकजुट किया, बल्कि आदिवासी समाज के हक और अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया। उनके प्रयासों का ही नतीजा था कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
स्व. दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर राज्य भर में कई स्थानों पर स्मृति सभाएं और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों ने उनके जीवन और कार्यों को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने भी अपने संदेश में जोर दिया कि स्व. दुर्गा सोरेन का सपना एक समृद्ध और समावेशी झारखंड था, जिसे साकार करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। यह दिन न केवल उनकी स्मृति को सम्मान देने का अवसर है, बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलने का भी संकल्प लेने का समय है।
