dulhasti hydropower project phase 2 jammu kashmir: श्रीनगर। भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि के निलंबन की पृष्ठभूमि में जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत क्षमता को बड़ा बल मिला है . किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर प्रस्तावित दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना के दूसरे चरण को पर्यावरण संबंधी मंजूरी मिल गई है. जिससे इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
पर्यावरण मंत्रालय से मिली अहम मंजूरी
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने 19 दिसंबर को इस परियोजना को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की यह 260 मेगावाट क्षमता की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है. जिस पर करीब 3200 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है. मंजूरी के बाद अब परियोजना के लिए निविदाएं जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
सिंधु जल संधि के संदर्भ में क्यों अहम है यह फैसला?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित कर दिया है और चिनाब नदी की जलविद्युत संभावनाओं पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया जा रहा है हालांकि आधिकारिक दस्तावेजों में यह स्पष्ट किया गया है कि दुलहस्ती परियोजना संधि के तकनीकी प्रावधानों के दायरे में ही विकसित की जा रही है ।
पहले भी मिल चुकी है बड़ी परियोजना को मंजूरी
इससे पहले चिनाब नदी पर प्रस्तावित 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना को भी मंजूरी दी जा चुकी है। यह जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना मानी जाती है 1960 के दशक में परिकल्पित यह परियोजना पाकिस्तान की आपत्तियों के चलते दशकों तक अटकी रही थी, जिसे अब राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
क्या है दुलहस्ती परियोजना का दूसरा चरण?
दुलहस्ती जलविद्युत परियोजना का दूसरा चरण, पहले से संचालित 390 मेगावाट के दुलहस्ती चरण-I का विस्तार है.पहला चरण वर्ष 2007 में NHPC लिमिटेड द्वारा शुरू किया गया था । जनवरी 2021 में NHPC और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच इस परियोजना को 40 वर्षों के BOOT मॉडल (निर्माण-स्वामित्व-संचालन-हस्तांतरण) पर लागू करने के लिए समझौता हुआ था।
dulhasti hydropower project phase 2 jammu kashmir: तकनीकी संरचना और उत्पादन क्षमता
परियोजना में मौजूदा बांध और जलाशय का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही 3.6 किलोमीटर लंबी नई सुरंग दो 130 मेगावाट की इकाइयों वाला भूमिगत पावर हाउस अतिरिक्त बिजली उत्पादन के लिए 215 मीटर लंबी सहायक सुरंग का निर्माण किया जाएगा. पूरी होने पर इस परियोजना से सालाना करीब 1093 मिलियन यूनिट बिजली के उत्पादन की उम्मीद है।
