DU Principal Applies Cow Dung to Classroom for Cooling : प्रिंसिपल ने कहा यह रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है
DU Principal Applies Cow Dung to Classroom for Cooling : दिल्ली, 14 अप्रैल 2025: दिल्ली यूनिवर्सिटी के लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कॉलेज के क्लास रूम की दीवारों पर गोबर का लेप लगाती नजर आ रही हैं। इस वीडियो में प्रिंसिपल ने स्पष्ट किया कि यह रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है और यह देसी तरीके से गर्मियों में ठंडक बनाए रखने का एक प्रयोग है।
गोबर से दीवारें लिपने का कारण: पारंपरिक तकनीक का उपयोग
प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला ने कहा, “यह एक रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो हमारे कॉलेज के एक फैकल्टी सदस्य की देखरेख में चल रहा है।” उन्होंने बताया कि इस प्रयोग के तहत गोबर और मिट्टी जैसी प्राकृतिक चीजों को ठंडक बनाए रखने के लिए दीवारों पर लगाया जा रहा है। वीडियो में वह खुद ही गोबर से दीवारों को सजा रही हैं, जो कुछ लोगों को चौंका सकता है, लेकिन वत्सला ने इसे पारंपरिक भारतीय ज्ञान के रूप में स्वीकारा।
क्या है इस रिसर्च प्रोजेक्ट का उद्देश्य?
प्रिंसिपल वत्सला के अनुसार, इस रिसर्च का नाम “पारंपरिक भारतीय ज्ञान का उपयोग करके थर्मल स्ट्रेस कंट्रोल का अध्ययन” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, इस प्रोजेक्ट के डेटा को एक हफ्ते में सार्वजनिक किया जाएगा। इस रिसर्च का उद्देश्य यह जानना है कि गोबर और मिट्टी का उपयोग करके कक्षा के तापमान को ठंडा रखा जा सकता है।
गोबर से दीवारों को लिपने का पारंपरिक महत्व
भारत में गोबर का उपयोग सदियों से घरों को शुद्ध और ठंडा रखने के लिए किया जाता रहा है। गोबर को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, किसी भी धार्मिक आयोजन से पहले आंगन को गोबर से लिपा जाता था, ताकि वह स्थान पवित्र हो जाए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोबर के कई फायदे हैं, जो इसे पर्यावरण के अनुकूल और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बनाते हैं
गोबर के फायदे:
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घर को ठंडा रखना:
गाय के गोबर में इन्सुलेटिंग गुण होते हैं, जो घर के तापमान को ठंडा रखने में मदद करते हैं। यह खासतौर पर गर्मी के मौसम में कारगर साबित होता है। -
कीट-पतंगों से सुरक्षा:
गोबर का उपयोग कीटों और मच्छरों को घर से बाहर रखने में भी मदद करता है। यह एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक की तरह काम करता है। -
धूल से बचाव:
जब गोबर और पानी का मिश्रण फर्श पर लगाया जाता है, तो एक चिकनी और सख्त सतह बनती है, जिससे घर में धूल की मात्रा कम होती है और वातावरण साफ रहता है।
अफवाहों से बचने की अपील
प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला ने वीडियो में यह भी कहा कि कुछ लोग इस प्रोजेक्ट के बारे में बिना जानकारी के अफवाह फैला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक विज्ञान आधारित प्रयोग है, जो पारंपरिक भारतीय तकनीकों का उपयोग करता है। इस प्रकार के प्रयोग से कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों को सतत विकास और पर्यावरणीय अनुकूल समाधान के बारे में सीखने का मौका मिलेगा।
विज्ञान और परंपरा का संगम
प्रिंसिपल ने कहा, “हमारे देश में सदियों से ऐसे कई पारंपरिक तरीके रहे हैं, जो अब विज्ञान के साथ मिलकर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में योगदान दे सकते हैं। यह रिसर्च प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक कदम है।” उनका मानना है कि भारत का पारंपरिक ज्ञान पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और इसे विज्ञान के साथ जोड़ने से नई संभावनाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
भारतीय ज्ञान का महत्व
दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज की प्रिंसिपल प्रत्यूष वत्सला का यह प्रयोग यह साबित करता है कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान का सही मिश्रण, आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में भी मददगार साबित हो सकता है। गोबर के लेप का यह प्रयोग न केवल देसी तकनीक को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण के लिए भी एक कदम आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।
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