Don’t Make Roti on These Festivals: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, व्रत और त्योहारों के साथ कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। धर्मशास्त्रों के अनुसार कुछ तिथियां और पर्व ऐसे होते हैं, जब घर में रोटी बनाना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन खास दिनों पर रोटी बनाने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर में दरिद्रता का वास हो सकता है।
Don’t Make Roti on These Festivals…
Don’t Make Roti on These Festivals: दीपावली पर तवे का प्रयोग वर्जित…
दीपावली, मां लक्ष्मी के स्वागत का सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन यदि कोई रसोई में तवा चढ़ाकर रोटी बनाता है, तो यह शास्त्रों के अनुसार अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी घर में प्रवेश नहीं करतीं और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
शरद पूर्णिमा पर रोटी बनाना अशुभ क्यों?
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पूर्ण होता है। इस शुभ रात्रि में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को धन-संपदा का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन रोटी बनाने को मां लक्ष्मी की कृपा को ठुकराने जैसा माना जाता है।

नाग पंचमी और कालसर्प दोष का संबंध…
नाग पंचमी के दिन रोटी बनाना वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन तवे पर रोटी पकाने से नाग देवता क्रोधित हो सकते हैं और राहु-केतु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे कालसर्प दोष उत्पन्न हो सकता है।
मृत्यु होने पर रोटी बनाना क्यों मना है?
जब किसी घर में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो अंत्येष्टि संस्कार से पहले रोटी बनाना निषेध होता है। शास्त्रों में इसका स्पष्ट उल्लेख है कि चिता ले जाते समय कुछ विशेष वस्तुएं साथ रखी जाती हैं, जिनमें रोटी भी होती है। इसलिए इस समय तवा चढ़ाना और रोटी बनाना वर्जित होता है।
शीतला अष्टमी: जब बासी भोजन का होता है महत्व…
शीतला अष्टमी या सप्तमी के दिन देवी शीतला को ठंडा और बासी भोजन अर्पित किया जाता है। इस दिन नई रोटी या ताजा भोजन नहीं बनाया जाता। घरवाले भी उसी बासी भोजन को ग्रहण करते हैं। यह परंपरा विशेष रूप से उत्तर भारत में प्रचलित है।
Don’t Make Roti on These Festivals: पकवान से करें भोग, रोटी से नहीं..
मां लक्ष्मी से जुड़ी तिथियों जैसे दीवाली, अक्षय तृतीया, कोजागरी पूर्णिमा आदि पर रोटी की बजाय मीठे पकवान, खीर, हलवा, पूरी आदि बनाए जाते हैं। इन्हीं चीजों से देवी को भोग लगाया जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
इन परंपराओं के पीछे धार्मिक आस्था और मान्यताएं जुड़ी हैं। हालांकि समय के साथ परंपराएं और पालन की शैली में बदलाव जरूर आया है, लेकिन आज भी कई परिवार इन नियमों को मानकर धार्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बनाए रखने का प्रयास करते हैं।
