Dollar v/s Rupee: भारतीय रुपये मे लगातार गिरावट देख रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (R B I) अपने एक्शन मोड मे आ गई है और रुपये के ग्लोबल ट्रेड को मजबूत करने के लिये फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों मे कई बदलावों का
प्रस्ताव रखा है जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स और ग्लोबल ट्रेडर्स को डॉलर की बजाये रुपये मे लेन -देन करने की सुविधाएं मिलेगी.
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Dollar v/s Rupee: आरबीआई ने अनिवासी भारतियों को भारतीय बैंकों की शाखाओं के माध्यम से विदेशों मे INR खाते खोलने, इन खातों से भारतीय एक्सपोर्टर्स से लेन-देन का भुगतान या सेटलमेंट, विदेशों मे किसी भी विदेशी करेंसी मे खाता
खुलवाने जिसमे एक्सपोर्ट आय और एक्सपोर्ट भुगतान करने की अनुमति दे दी है.
Dollar v/s Rupee: माना जा रहा है की डॉलर के मुक़ाबले लगातार गिरते रुपये को रोकने, भारतीय रुपये को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने, हमारे एक्सपोर्टर्स को लेन – देन मे ज़्यादा आसानी और विशेष अनिवासी रुपया खाता (SNRR ) को ज़्यादा
आकर्षक बनाने के लिये आर बी आई ने ये फैसला लिया है जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ता है.
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Dollar v/s Rupee: आर बी आई ने इससे पहले 2022 मे Special Rupee Vostro Accounts पेश किये थे जिससे भारतीय बैंक्स रुपये मे ट्रेड सेटलमेंट कर सकते हैं l इन खातों को विदेशी बैंक विदेश मे स्तिथ किसी भी भारतीय बैंक मे खोल सकते हैं और
इसे बढ़ावा देने के लिये इंडोनेशिया, माल्दीव और संयुक्त अरब अमीरात के केंद्रीय बैंक्स के साथ एम ओ यू भी किया था l अब SNRR खाते उन अनिवासी के लिये बनाए गये हैं जो भारत के साथ व्यापार करना चाहते हैं और इन खातों का इस्तेमाल देश के भीतर लेन-देन सेटलमेंट के लिये करना चाहते हैं.
Dollar v/s Rupee: इसके अलावा विदेशी निवेशक INR खाते का इस्तेमाल भारत मे निवेश के लिये भी कर सकते हैं आरबीआई के इस इस कदम से उम्मीद की जा रही है की आने वाले समय मे डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रुपये मे गिरावट पर रोक लग सकेगी जिससे शायद विदेशी निवेशक कम बिकवाली करें और निरंतर गिरते शेयर बाजाऱ को कुछ राहत मिल सके.
