सुप्रीम कोर्ट ने दिया था शेल्टर होम भेजने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली और एनसीआर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 8 हफ्ते के भीतर सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश के बाद विभिन्न पशु संगठनों और नेताओं ने इसे लेकर सवाल उठाए थे। इन आपत्तियों के बाद, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई ने बुधवार को यह आश्वासन दिया कि वे इस मामले पर पुनः विचार करेंगे और इसे और गंभीरता से देखेंगे।

आदेश और CJI का नया रुख
यह मामला और जटिल हो गया था जब याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष यह मुद्दा रखा कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम, 2001 के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का काम सही तरीके से नहीं हो रहा है। इसके कारण कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो उनके अस्तित्व और सुरक्षा के लिए भी खतरे की बात हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश – कोई बाधा डाली तो होगी अवमानना
11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कड़ा फैसला सुनाते हुए कहा था कि सभी कुत्तों को आवासीय क्षेत्रों से हटाकर शेल्टर होम भेजा जाएगा। कोर्ट ने इस काम में कोई भी बाधा डालने पर अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश बेजुबान कुत्तों और उनके संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठा रहा था। कोर्ट ने पशु प्रेमियों से यह भी पूछा था कि क्या वे रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के शिकार हो चुके बच्चों को वापस ला सकते हैं? इस फैसले के बाद, कई पशु संगठनों ने इसे मनुष्यता और ममता की भावना के खिलाफ माना, क्योंकि यह आदेश बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता का प्रतीक हो सकता था।

कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अपनी आपत्ति जताई। राहुल गांधी ने इसे ‘मानवीय और वैज्ञानिक पॉलिसी’ के खिलाफ एक कदम बताया, जो दशकों से चल रही है। उनका कहना था कि बेजुबान पशु कोई समस्या नहीं हैं, जिन्हें इस तरह से हटाया जाए।
प्रियंका गांधी ने कुत्तों को ‘सबसे सुंदर और कोमल प्राणी’ बताते हुए कहा कि इस तरह का फैसला अत्यधिक अमानवीय है। उनका यह भी कहना था कि इस आदेश के मुताबिक आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजना और उन्हें वहां रखना एक असंभव कार्य है, क्योंकि शेल्टर होम की कमी है और शहर में जानवरों के साथ दुर्व्यवहार भी होता है।
मेनका गांधी और पशु अधिकार संगठनों की चिंता
पशु अधिकारों की सबसे बड़ी समर्थक, मेनका गांधी ने भी इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि दिल्ली में तीन लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। इन सभी कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के लिए दिल्ली सरकार को हज़ारों शेल्टर होम बनाने होंगे। लेकिन इन शेल्टर होम में पर्याप्त स्थान नहीं है, और एक ही स्थान पर अधिक कुत्तों को रखना भी संभव नहीं होगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला जानवरों के प्रति एकतरफा और भेदभावपूर्ण है, जो कुत्तों के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।
क्या है आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे का कारण?
आवारा कुत्तों का बढ़ता संख्या और उनके साथ होने वाली घटनाएं चिंता का कारण बन गई हैं। विशेष रूप से दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जहां की सड़कों पर आवारा कुत्ते अक्सर दिखते हैं, उनकी बढ़ती संख्या से कई बार डॉग बाइट्स और रेबीज जैसे गंभीर मामलों का सामना करना पड़ता है। जैसे कि 2024 में 37 लाख से ज्यादा डॉग बाइट्स के मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 54 लोग रेबीज से अपनी जान गंवा बैठे थे।

इन घटनाओं के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह कड़ा फैसला लिया था, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि कुत्तों के संरक्षण का काम भी जरूरी है। क्या यह सिर्फ कुत्तों को शेल्टर होम भेजने का समाधान है, या हमें एक ऐसी नीति बनानी चाहिए, जो इन जानवरों की सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य की भी रक्षा करे?
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