Diwali Health Safety: हिंदु धर्म का सबसे लोकप्रिय त्योहार दिवाली, जिसमें चारों तरफ जगमगाहट देखने को मिलती है। पूरा देश हर्ष और उत्साह के साथ ये त्योहार मनाता है। घरों की सफाई की जाती है और सजावट की जाती है। मिठाईया बनती है बच्चे से लेकर बड़ो तक लोग आतिशबाजी करते हैं। लेकिन इसके साथ ही कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
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पटाखों का धुंआ, प्रदूषण और शोर कई बार समस्या का कारण बनती है। और कई बार लोग पटाखे जलाते समय लपरवाही करते जिससे हाथ जल जाता है, आग लग जाती है। हर साल हजारों की संख्या में लोग बीमर पड़ते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी आपकी दिवाली को सुरक्षित और खुशहाल बना सकती है।
चिकित्सो की विशेष सलाह…
सूत्रो के अनुसार, राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह बताते हैं कि दिवाली के दौरान प्रदूषण बढ़ जाता है, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, आंखों में जलन और सांस की दिक्कत जैसी समस्याओं में इजाफा देखने को मिलता है। उन्होंने लोगों को पटाखे चलाते समय और खान -पान में सजग रहने की सलाह दी है।
दिवाली के दौरान बढ़ने वाले प्रमुख स्वास्थ्य जोखिम…
अस्थमा और ब्रोंकाइटिस का खतरा…
पटाखों से निकलने वाला धुआं वातावरण में PM2.5, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें फैलाता है। ये गैसें फेफड़ों में सूजन पैदा करती हैं और अस्थमा या ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारियाँ हैं, उनके लिए दिवाली अतिरिक्त जोखिम लेकर आती है।

बचाव:-
1. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं और इनहेलर अपने पास रखें।
2. अधिक धुएं वाली जगहों से दूर रहें।
3. घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें या मास्क पहनें।
आंखों में जलन और एलर्जी…
दिवाली की रात हवा में सल्फर और कार्बन कणों की मात्रा बढ़ जाती है, जो आंखों में जलन और लालपन का कारण बनती है। कई लोगों को एलर्जी और पानी आने की समस्या भी होती है।

बचाव:-
1. बाहर निकलते समय चश्मा पहनें।
2. आंखों को रगड़ें नहीं, ठंडे पानी से धोएं।
3. दिक्कत बढ़ने पर आई ड्रॉप या डॉक्टर की सलाह लें।
सांस लेने में दिक्कत…
धुएं से भरी हवा फेफड़ों की ऑक्सीजन लेने की क्षमता कम कर देती है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में सांस फूलना, सीने में दर्द और खांसी की शिकायत बढ़ जाती है।

बचाव:-
1. पटाखों से दूरी बनाए रखें।
2. बच्चों को खुले में देर तक खेलने न दें।
3. गरम पानी और भाप लें।
पटाखों से चोट और जलना…
दिवाली के दौरान पटाखों से लगी छोटी आग बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। खासकर बच्चे लापरवाही से पटाखे हाथ में पकड़कर जला देते हैं, जिससे हाथ-पैर जलने के मामले आम होते हैं।
बचाव:-
1. खुली जगह में पटाखे जलाएं।
2. बाल्टी में पानी और प्राथमिक उपचार सामग्री पास रखें।
3. ढीले कपड़े न पहनें, सिंथेटिक कपड़ों से बचें।
आग लगने की दुर्घटनाएं…
मोमबत्तियों, दीयों और फुलझड़ियों की वजह से हर साल सैकड़ों घरों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं।
बचाव:-
1. पर्दों और सजावट से दूर दिए जलाएं।
2. गैस सिलेंडर और बिजली के तारों से सावधान रहें।

पाचन समस्याएं और मोटापा…
दिवाली का जश्न मिठाइयों के बिना अधूरा होता है। लेकिन अधिक तला-भुना और मीठा खाने से पेट दर्द, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अधिक कैलोरी लेने से वजन और कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ता है।
बचाव:-
1. खाने में मात्रा का ध्यान रखें।
2. मीठी और तली चीजों की जगह हेल्दी स्नैक्स खाएं।
3. पानी और फाइबरयुक्त भोजन लें।
सुनने की क्षमता पर असर…
पटाखों के तेज शोर (140-160 डेसीबल) से कानों पर असर पड़ता है। इससे कानों में घंटी बजना (टिनिटस), दर्द या सुनने की कमजोरी भी हो सकती है।
बचाव:-
1. कानों को कॉटन या ईयरप्लग से बचाएं।
2. छोटे बच्चों को तेज आवाज से दूर रखें।
सुरक्षित दिवाली ऐसे मनाएं…
1. कम प्रदूषण वाले ग्रीन क्रैकर्स का इस्तेमाल करें।
2. मास्क और चश्मे पहनें।
3. बच्चों पर निगरानी रखें।
प्रदूषण बढ़ने पर डॉक्टर की सलाह लें…
दिवाली खुशी, रोशनी और अपनेपन का त्योहार है। इसे उत्साह से मनाने के साथ सेहत का भी ख्याल रखना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी आपकी और आपके परिवार की दिवाली को सुरक्षित बना सकती है। सुरक्षित रहें, खुशी बांटें और स्वस्थ दिवाली मनाएं।
