Diwali Celebrations Around the World: दिवाली, भारत का सबसे बड़ा और लोकप्रिय त्योहार, हर इलाके में अलग अंदाज में मनाया जाता है। यह पर्व न केवल देवी-देवताओं की पूजा का अवसर होता है, बल्कि पुरखों की याद, घर में रोशनी और खुशहाली लाने का प्रतीक भी माना जाता है। भारत में दिवाली की यही विविधता इसे खास बनाती है। कहीं लोग आतिशबाज़ी से आसमान को जगमगाते हैं, तो कहीं शांत दीपों से नदियों के घाट और घरों की चौखट जगमगाती है।
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भारत में दिवाली की अनोखी परंपराएं….
ऊंट मेला और रंगीन उत्सव- पुष्कर, राजस्थान
राजस्थान के रेगिस्तानी शहर पुष्कर में दिवाली के समय लगने वाला ऊंट मेला किसी उत्सव से कम नहीं होता। हजारों ऊंट, घोड़े और पशुपालक इस मेले में हिस्सा लेते हैं। रेतीली ज़मीन पर रंग-बिरंगे कपड़े, लोक नृत्य और संगीत पूरे माहौल को जीवंत बना देते हैं। शाम को झील के किनारे दीप जलाना इस त्योहार का सबसे आकर्षक दृश्य होता है।

नरकासुर दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत – गोवा
गोवा में दिवाली सूरज निकलने से पहले शुरू होती है, जब लोग राक्षस नरकासुर के पुतले को जलाते हैं। बच्चे और युवा कई दिनों पहले से बांस, कपड़े और रंगों से बड़े-बड़े पुतले बनाते हैं। सुबह होते ही इन पुतलों को पटाखों के साथ जलाया जाता है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और गोवा के हर गली-मोहल्ले में जोश के साथ निभाई जाती है।

भावनात्मक दिवाली और पुरखों का स्मरण – ओडिशा
ओडिशा में दिवाली को भावनात्मक रूप में मनाया जाता है। रात को लोग जलती हुई लकड़ियां लेकर घरों के सामने खड़े होते हैं और पुरखों को याद करते हुए एक विशेष मंत्र बोलते हैं, जिसमें उन्हें घर आने का न्योता दिया जाता है। माना जाता है कि इस रात पुरखों की आत्माएं लौटती हैं और अपने घरवालों को आशीर्वाद देती हैं।

देव दीपावली – वाराणसी
वाराणसी में दिवाली के 15 दिन बाद देव दीपावली मनाई जाती है। इस दिन गंगा घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं। पुजारी आरती करते हैं और भक्त नावों में बैठकर जल में दीप प्रवाहित करते हैं। यह दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है और देखने वाला इसे कभी नहीं भूल सकता।

पर्व का विशेष महत्व – दक्षिण भारत
दक्षिण भारत में दिवाली का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। अरुणाचल पर्वत की चोटी पर विशाल दीप जलाया जाता है, जिसे दूर-दूर से देखा जा सकता है। मंदिरों और घरों में दीयों की कतारें सजाई जाती हैं। इसे भगवान शिव के प्रकाश रूप का प्रतीक माना जाता है। हालांकि यह पर्व दिवाली के कुछ दिन बाद मनाया जाता है, लेकिन भावना वही रहती है—अंधकार से उजाले की ओर।
गुरु हरगोबिंद जी की रिहाई – सिख समुदाय
सिख समुदाय दिवाली को गुरु हरगोबिंद जी की रिहाई के रूप में मनाता है। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर इस दिन दीयों से जगमगाता है। लंगर, भजन और सेवा के इस माहौल में श्रद्धा की गहरी भावना देखने को मिलती है।
मां काली की आराधना – बंगाल
जब भारत के अधिकांश हिस्सों में लक्ष्मी पूजा की जाती है, बंगाल में मां काली की आराधना होती है। डरावनी लेकिन शक्तिशाली मूर्तियां, लाल रोशनी और धूप-दीपों की सुगंध से कोलकाता की गलियां सजती हैं।

दुनिया में दिवाली का उत्सव…
इंग्लैंड – लंदन और लेस्टर
भारत की तरह ही इंग्लैंड में भी दिवाली धूमधाम से मनाई जाती है। लंदन में हिंदू, जैन और सिख समुदाय इसे बड़े उत्साह के साथ सेलिब्रेट करते हैं। हर इलाके को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और पटाखे फोड़े जाते हैं। लेस्टर में भी यह पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है।

जापान – ओनियो फेयर फेस्टिवल
जापान में हर साल जनवरी में ओनियो फेयर फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। फुकुओका में दिवाली जैसी लाइटिंग और उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान 6 मशालें जलाई जाती हैं, जिन्हें आपदा को खत्म करने का प्रतीक माना जाता है। आग की बत्ती को मंदिर से निकालकर दूसरी जगह ले जाने की परंपरा भी निभाई जाती है।

अमेरिका – फ्लोरिडा का सैमहेन फेस्टिवल
फ्लोरिडा के अल्टूना शहर में हर साल 31 अक्टूबर से 1 नवंबर तक ‘सैमहेन’ फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। यह भूतों के सम्मान में मनाया जाता है। बॉन फायर जलाए जाते हैं और मनोरंजन एवं अलग-अलग थीम्स पर आयोजित गतिविधियां देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

नेपाल – तिहार फेस्टिवल
नेपाल में दिवाली को तिहार फेस्टिवल के रूप में मनाया जाता है, जिसमें पांच दिनों तक विभिन्न जानवरों की पूजा की जाती है। खासतौर पर कुत्तों, कौवों और गाय की पूजा की जाती है। यह त्योहार घर में सुख, समृद्धि और पशुओं के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
