1.10 करोड़ की ठगी: बुजुर्ग को किया डिजिटल अरेस्ट, 1.10 करोड़ की साइबर ठगी: वाराणसी में तीन शातिर गिरफ्तार, मास्टरमाइंड भी पकड़ा गया
📍 ठग बने CBI अफसर और मुंबई पुलिस, 6 दिन तक रखा बुजुर्ग को फोन पर बंधक जैसा; जानिए कैसे बुना गया फरेब का जाल
हाइलाइट्स:
-
वाराणसी के लठिया निवासी बुजुर्ग से 1.10 करोड़ की ठगी
-
CBI और मुंबई पुलिस बनकर डराया गया
-
छह दिन तक लगातार फोन पर डिजिटल अरेस्ट
-
साइबर क्राइम पुलिस ने तीन आरोपी पकड़े
-
विदेशी नेटवर्क से जुड़ा है गिरोह
ठगी की पूरी पटकथा: कैसे बुजुर्ग को फंसाया गया?
1.10 करोड़ की ठगी: वाराणसी के रोहनिया इलाके में रहने वाले 65 वर्षीय महेश प्रसाद को एक दिन एक अंजान कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई पुलिस का अफसर बताया। उसने कहा कि आपका नाम मनी लॉन्ड्रिंग केस में आ चुका है, और जल्द ही CBI आपकी गिरफ्तारी करने वाली है। इससे पहले कि महेश जी कुछ समझ पाते, उन्हें धमकियों और डर के साए में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया।
डिजिटल अरेस्ट यानी, छह दिनों तक महेश को फोन कॉल पर लगातार बांधे रखा गया। उन्हें हर वक्त निर्देश दिए जाते रहे और कहा गया कि किसी से बात न करें, बाहर न जाएं और बताए अनुसार पैसे ट्रांसफर करते रहें। डर के मारे उन्होंने कुल 1.10 करोड़ रुपये कई खातों में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने कैसे किया खुलासा?
जैसे ही परिवार को शक हुआ, उन्होंने साइबर क्राइम थाना, वाराणसी में शिकायत दर्ज कराई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और रविवार को तीन शातिर ठगों को धर दबोचा।
पकड़े गए आरोपी:
-
सुमित गुप्ता – बक्सीपुर, गोरखपुर
-
उत्कर्ष वर्मा – मिदानिया, लखीमपुर खीरी
-
अरविंद वर्मा – सृष्टि अपार्टमेंट, गौतमबुद्ध नगर
इनके पास से 70 हजार रुपए नकद, 8 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, 7 डेबिट कार्ड, एक चेकबुक और चार पासबुक बरामद की गई हैं।
गिरोह का काम करने का तरीका
1.10 करोड़ की ठगी: डीसीपी क्राइम सरवणन टी. के अनुसार, यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले फर्जी पहचान से बैंक खाते खुलवाए जाते थे। फिर विदेशी साइबर ठगों से मिलकर इन खातों में ठगी के पैसे मंगवाए जाते थे। उसके बाद रकम को कई खातों में घुमाकर ATM से निकाल लिया जाता था और डॉलर में कमीशन के तौर पर विदेशी नेटवर्क को भेज दिया जाता था।
1.10 करोड़ की ठगी: पहले भी जा चुके हैं जेल
जांच में यह सामने आया है कि गिरोह के सदस्य पहले भी नोएडा और लखनऊ जैसे शहरों से गिरफ्तार हो चुके हैं। ADCP नीतू और ACP विकास सिंह के मुताबिक इनपर पहले से भी साइबर अपराध के कई मामले दर्ज हैं।
