different types equity mutual funds: इक्विटी म्यूचुअल फंड एक प्रकार की निवेश योजनाएं होती हैं जिसमे निवेशक अपना पैसा जमा करते हैं जिससे एक फंड जमा होता है और इस जमा रकम को स्टॉक, बांड्स, और दूसरे सिक्योरिटी में जमा किया जाता है जिसे फंड प्रबंधकों द्वारा मैनेज किया जाता है.
बाजाऱ के अलग अलग तरह के म्यूचुअल फंड्स संचालित हैं और इन म्यूचुअल फंड्स को अलग-अलग नामों और कैटेगरी से जाना जाता है तो उन्हें एक-दूसरे से किस आधार पर अलग किया जाता है इस पर विस्तृत जानकारी….
लार्ज कैप या ब्लू चिप म्यूच्यूअल फंड्स
म्यूचुअल फंड्स की अलग-अलग कैटेगरी की जानकारी देने वाले सेबी के 2018 से लागू सर्कुलर अनुसार इनमें ब्लू चिप फंड का कोई जिक्र नहीं है. ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर कोई फंड मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों में निवेश करता है, तो उसे लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में ही रखा जाता है हालांकि ब्लू चिप कंपनी फंड्स भी बाजार की दिग्गज कंपनियों में ही निवेश करते हैं और इस लिहाज से वे भी लार्ज कैप फंड ही हैं, सीधे-सीधे कहें तो ब्लूचिप फंड भी दरअसल लार्ज कैप फंड ही होते हैं सिर्फ उनका नामकरण अलग है सेबी के अनुसार लार्ज कैप फंड्स या ब्लू चिप फंड्स मुख्य तौर पर उन कंपनियों में निवेश करते हैं जो मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से बाजार की टॉप 100 कंपनियों में शामिल होती हैं और जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन रुपये 20000 करोड़ या उससे अधिक होता है lलार्ज कैप फंड्स अपने कॉर्पस का कम से कम 80% हिस्सा उन कंपनियों के स्टॉक में लगाते हैं, जो मार्केट कैप के लिहाज से मार्केट की टॉप 100 कंपनियों में शामिल होती हैं. ये कंपनियां काफी बड़ी होने की वजह से आम तौर पर मजबूत मानी जाती हैं और स्टाइल रिटर्न देते हैं. यानी इनमें रिस्क तुलनात्मक रूप से कम माना जाता है.
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मिड कैप फंड्स
ये फंड्स अपने कॉर्पस का कम से कम 65% हिस्सा मिड कैप स्टॉक्स में निवेश करते हैं. मिड कैप स्टॉक्स उन कंपनियों के शेयरों को कहते हैं, जो मार्केट कैप के लिहाज से बाजार में 101वें से 250वें नंबर पर आती हैं और जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन रुपये 5000 से 20000 करोड़ होता है और इन कंपनियों में आमतौर पर ग्रोथ पोटेंशियल और हाई रिटर्न देने की क्षमता लार्ज कैप से अधिक मानी जाती है, लेकिन इनमें रिस्क भी उनसे अधिक रहता है .
स्मॉल कैप फंड्स
ये फंड्स अपने कॉर्पस का कम से कम 65% हिस्सा स्मॉल कैप स्टॉक्स में निवेश करते हैं. स्मॉल कैप स्टॉक्स उन कंपनियों के शेयर्स को कहते हैं, जिनकी रैंक मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से बाजार में 251 वें नंबर पर या उससे नीचे होती है और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन रुपये 5000 करोड़ से कम होता है l इन स्टॉक्स में रिटर्न की संभावना और रिस्क दोनों ही, लार्ज कैप और मिड कैप से ज्यादा माने जाते हैं.
मल्टी कैप
फ्लेक्सी कैप जैसे डायवर्सिफाइड फंड – म्यूचुअल फंड में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप की कैटेगरी मार्केट कैप के अलग-अलग सेगमेंट में निवेश के आधार पर बनती है. लेकिन कई डायवर्सिफाइड फंड ऐसे होते हैं, जो इन सभी कैटेगरी में बांटकर निवेश करते हैं, फ्लेक्सी कैप और मल्टी कैप इस तरह के फंड्स की पॉपुलर कैटेगरी हैं और मल्टी कैप फंड के पोर्टफोलियो में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप, तीनों का हिस्सा 25-25% होता है, जबकि फ्लेक्सी कैप में ये हिस्सेदारी फिक्स नहीं होती. फंड मैनेजर लार्ज, मिड और स्मॉल कैप, तीनों सेगमेंट के शेयर्स में अपनी समझ के हिसाब से निवेश करते हैं, इनके अलावा लार्ज एंड मिड कैप फंड भी होते हैं, जो कम से कम 35% निवेश लार्ज कैप में और मिनिमम इतना ही निवेश मिड कैप में करते हैं .
इक्विटी फंड की अन्य प्रमुख कैटेगरी – इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में सेक्टोरल या थीमैटिक फंड, फोकस्ड फंड, इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS), वैल्यू फंड, कॉन्ट्रा फंड, डिविडेंड यील्ड फंड जैसी कई और कैटेगरी भी होती हैं, इनमें सेक्टोरल या थीमैटिक फंड और ईएलएसएस में इक्विटी एक्सपोजर कम से कम 80% होता है, जबकि बाकी कैटेगरीज के फंड का कम से कम 65% इक्विटी में निवेश करना जरूरी है .
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different types equity mutual funds: निवेश के लिये सही फंड का चुनाव – इक्विटी फंड्स की इतनी सारी कैटेगरीज़ में से अपने लिए सही फंड कैटेगरी और फिर सही स्कीम का चुनाव करना आसान नहीं है. लेकिन एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि इक्विटी फंड्स में निवेश लंबे समय के लिए करना बेहतर रहता है. इसके अलावा सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये नियमित निवेश किया जाए, तो रिस्क को कम रखने में मदद मिलती है आम तौर पर डायवर्सिफाइड फंड को सेक्टोरल या थीमैटिक फंड्स की तुलना में कम रिस्की माना जाता है किसी भी इक्विटी फंड में निवेश का फैसला करते समय निवेशकों को अपनी रिस्क लेने की क्षमता, निवेश के उद्देश्य और निवेश की अवधि पर ध्यान रखना चाहिए साथ ही म्यूचुअल फंड्स की अलग-अलग कैटेगरी को समझना और अपनी जरूरतों के अनुसार सही फंड का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण है, सही रणनीति और समझदारी के साथ किया गया निवेश ही बेहतर रिटर्न दिला सकता है .
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