Anant Ambani Padyatra : भक्ति और शक्ति की इस अद्भुत यात्रा में 81 किलोमीटर की दूरी तय
Anant Ambani Padyatra : रिलायंस समूह के अनंत अंबानी की द्वारका पदयात्रा आज अपने आठवें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान, विख्यात संत और कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री ने भी इस पदयात्रा में भाग लिया और इसे ‘भक्ति और शक्ति की यात्रा’ करार दिया। इस अद्वितीय यात्रा में अनंत अंबानी ने कुल 81 किलोमीटर की दूरी तय की, जो आठ दिनों में पूरी की गई।
पदयात्रा का रूट और अनंत अंबानी का समर्पण
आज सुबह पांच बजे, अनंत अंबानी ने महादेवड़िया गांव के पास से यात्रा शुरू की और खाड़ी के पास जाकर अपनी यात्रा को समाप्त किया। इस दौरान, उन्होंने समर्पण, भक्ति और आत्मिक शांति की भावना को महसूस किया। अनंत अंबानी के साथ धीरेंद्र शास्त्री भी इस यात्रा के एक अहम हिस्सा बने, जिन्होंने इसे एक दिव्य यात्रा का अनुभव बताया।

यात्रा के दौरान अंबानी ने न केवल शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण मार्ग तय किया, बल्कि उन्होंने मानसिक और आत्मिक शांति की प्राप्ति की भी बात की। अंबानी ने इस यात्रा को एक भव्य अनुभव माना और इसमें आस्था और समर्पण की महत्ता को रेखांकित किया।
धीरेंद्र शास्त्री का योगदान और संदेश
इस यात्रा में शामिल होकर धीरेंद्र शास्त्री ने न केवल अनंत अंबानी का मार्गदर्शन किया, बल्कि उन्होंने भक्तिपूर्ण और शारीरिक रूप से कठिन इस यात्रा के महत्व को भी समझाया। शास्त्री ने कहा,
“यह यात्रा भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम है। यह न केवल शारीरिक तप है, बल्कि आत्मिक उन्नति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।”
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बातों में इस यात्रा को जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण और धैर्य का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में जो व्यक्ति खुद को समर्पित करता है, वह न केवल आत्मिक उन्नति करता है, बल्कि समाज में भी एक सकारात्मक प्रभाव छोड़ता है।
अनंत अंबानी की यात्रा के पीछे का उद्देश्य
अनंत अंबानी की पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य आत्मिक शांति और समर्पण के माध्यम से जीवन की कठिनाइयों को पार करना है। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन में संतुलन और मानसिक शांति की प्राप्ति के लिए यह कदम उठाया। अंबानी का मानना है कि इस तरह की यात्रा से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी मिलती है।
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धीरेंद्र शास्त्री और अनंत अंबानी की यह पदयात्रा न केवल एक शारीरिक यात्रा थी, बल्कि यह भक्ति, शक्ति और आत्मिक उन्नति का प्रतीक बन गई है। आठ दिनों में 81 किलोमीटर की दूरी तय करना और इस दौरान मानसिक और शारीरिक दृढ़ता का परिचय देना एक बड़ी उपलब्धि है। इस यात्रा से यह संदेश मिलता है कि समर्पण, विश्वास और धैर्य से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।
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