Dhirendra Shastri I Love Mohammad Statement : धीरेंद्र शास्त्री ने ‘आई लव मोहम्मद’ के विवादित बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि उनके कहे शब्दों को गलत समझा गया है और इसका कोई गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। विवाद के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी भी समुदाय की भावनाओं को आहत करना नहीं था,बल्कि वह एक धार्मिक व्यक्तित्व के प्रति सम्मान व प्रेम की भावना व्यक्त कर रहे थे।
विवाद की शुरुआत
धीरेंद्र शास्त्री के एक कार्यक्रम के दौरान “आई लव मोहम्मद” बोलने पर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर तीखी प्रतिक्रिया आई। कई समुदायों द्वारा इसे धार्मिक भावना के खिलाफ माना गया और विवाद गहराने लगा। शास्त्री का कहना था कि वह किसी की भावना को आहत नही करना चाहते है इस वाक्यांश के चलते धर्म, सामाजिक सद्भाव और समानता के मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। विवाद के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने खुद सफाई दी और अपने बयान की मंशा को समझाया।
I Love Mohammed पर बोले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हम किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन जो हमें छेड़ता है, उसे छोड़ते भी नहीं. ‘आई लव मोहम्मद’ कहना बुरा नहीं, लेकिन ‘आई लव महादेव’ भी उतना ही स्वीकार्य होना चाहिए.
नक्सवाद पर बोले शास्त्री
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में हो रहे प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा कि नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के लिए काला धब्बा था. इसका खात्मा स्वागतयोग्य है
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Dhirendra Shastri I Love Mohammad Statement : सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण
इस बयान को लेकर धार्मिक,सामाजिक संगठन अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोगों ने शास्त्री के बयान को सांप्रदायिक सौहार्द्र की भावना के विरुद्ध माना, जबकि कुछ ने इसे एक व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के रूप में स्वीकार किया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवादों से बचने के लिए संवाद और समझदारी की जरूरत है जिससे सामाजिक एकता बनी रहे।
विवाद के सामाजिक प्रभाव
धीरेंद्र शास्त्री के बयान को सामाजिक स्तर पर हवा दी जा रही है धार्मिक अभिव्यक्तियों या सम्मान की बात करते समय लोगों को संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए। विवाद ने यह दर्शाया कि कैसे एक अभिव्यक्ति समाज में अलग-अलग अर्थों में समझी जा सकती है, जिससे विचार-विमर्श और सहयोग आवश्यक हो जाता है।
धीरेंद्र शास्त्री के ‘आई लव मोहम्मद’ बयान से उत्पन्न विवाद ने समाज में संवाद,समझदारी की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान और विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द्र बनाए रखना महत्वपूर्ण है। विवादों को शांति और संवाद के माध्यम से सुलझाने की जरूरत है जिससे सामाजिक सद्भाव बना रहे।
