धराली में तबाही की वो रात जब वक़्त थम गया

5 अगस्त की रात। उत्तरकाशी के धराली गांव में लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जी रहे थे। किसी को नहीं पता था कि कुछ ही पलों में ये शांत सा गांव एक कब्रगाह बन जाएगा। ना बिजली कड़कती थी, ना बारिश तेज़ थी। लेकिन अचानक एक ऐसा धमाका हुआ, जिससे सब थर्रा उठे। यह बादल नहीं था जो फटा। यह हैगिंग ग्लेशियर था, जो 6,000 मीटर ऊंचे श्रीखंड पर्वत पर पिघल रहा था धीरे धीरे, चुपचाप… और फिर एक झटके में मलबे का समंदर धरती पर टूटा।
धराली अब सिर्फ एक नाम नहीं, एक ज़ख्म है
गांव में सैकड़ों घर, दुकानों की कतारें, मंदिर की घंटियों की आवाजें… अब सब मलबे में दबी हैं। 20 फीट ऊंचा मलबा, और उसके नीचे 150 से ज्यादा इंसानों के होने की आशंका। जब सैलाब आया, गांव के ज़्यादातर बुज़ुर्ग 300 मीटर दूर एक मंदिर में पूजा कर रहे थे। वे बच गए। लेकिन जिनके कंधों पर घर का बोझ था युवा, कारोबारी, पर्यटक वो इस कहर की चपेट में आ गए।

धराली मलबे में दब गया, और उसके साथ दब गईं अनगिनत कहानियां।
जब सिस्टम फेल हुआ, तो सेना आगे आई
भटवारी से धराली तक 60 किलोमीटर का रास्ता… अब सिर्फ एक कठिन पहाड़ी चुनौती है। सड़कें 5 जगहों पर टूटीं, पुल बह गए। जेसीबी मशीनें 36 घंटे तक फंसी रहीं। सेना ने मोर्चा संभाला बिना मशीनों के, सिर्फ अपने हाथों और हिम्मत से। बड़े बड़े बोल्डरों को हटाकर वो अब भी उम्मीदें तलाश रहे हैं। हर पत्थर के नीचे एक चेहरा हो सकता है, हर आवाज़ एक आखिरी सांस। गंगोत्री हाईवे पर भी हालात ऐसे ही हैं। गंगनानी पुल बह गया है। सेना वहां वैली ब्रिज बना रही है ताकि मदद किसी तरह धराली तक पहुंच सके।
हवा से भी मदद आएगी- वायुसेना तैयार
अब ज़मीन पर रास्ता नहीं तो आसमान से मदद की उम्मीद है। एमआई 17 हेलिकॉप्टर, ALH MK 3, AN 32 और C 295 जैसे एयरक्राफ्ट देहरादून पहुंच चुके हैं।
गुरुवार से रेस्क्यू ऑपरेशन और तेज़ हो जाएगा। लेकिन सवाल ये है कितनी जानें बची होंगी अब तक?
ग्लोबल वॉर्मिंग की गूंगी चेतावनी
मौसम विभाग के मुताबिक, उस दिन धराली में सिर्फ 2.7 सेमी बारिश हुई। यानी सामान्य। तो फिर इतना बड़ा सैलाब क्यों? वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. एसपी सती ने कहा यह कोई अचानक आई आपदा नहीं थी, ये वो जहर है जो हमने दशकों से प्रकृति को दिया है।

हिमालयी क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। हैगिंग ग्लेशियर जो हजारों सालों से जमे थे अब चुपचाप टूट रहे हैं। धराली एक चेतावनी है। हम सबके लिए।
36 घंटे बाद भी जारी है तलाश मलबे के नीचे इंसानियत दब गई है
अब तक 5 शव निकाले जा चुके हैं। 2 की पहचान हुई है। 100 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। केरल के 28 और महाराष्ट्र के 51 पर्यटकों को सेना ने खोज निकाला है। परिवार, दोस्त, साथी हर कोई अब एक नाम का इंतज़ार कर रहा है। कोई कॉल उठे, कोई मैसेज मिले… बस एक उम्मीद बाकी है।
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