DHAR BHOJSHALA NEWS: धार भोजशाला एक बार फिर चर्चा में है.. बता दें की 23 जनवरी को बसंत पंचमी है.. और इसके आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

दरअसल.. इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है. और हिंदू संगठनों ने दिन भर माता सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए प्रशासन से इजाजत मांगी है. वहीं इसी दिन मुस्लिम समाज भी नमाज पढ़ने आता है. इसको लेकर अब डर है की कहीं कोई त्योहार के कारण दंगे जैसा माहौल ना बन जाए.
DHAR BHOJSHALA NEWS: बता दें की इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच 3 बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी. और तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी.

इस बार खास ध्यान रखा जा रहा है की ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं. वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग है. इस पर आज यानी 22 जनवरी को सुनवाई होनी है.
आईए जानते है इतिहास

जानकारों की माने तो धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है. 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी.
जिसके बाद 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा.. लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की. इसके बाद कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला पर हमले किए.
बता दें की इस घटना से कई सालों तक मां सरस्वती की प्रतिमा भोजशाला में दबी रही. इसके बाद अंग्रेज आए. वे यहां से खुदाई कर वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम ले गए.
DHAR BHOJSHALA NEWS: खिलजी के आक्रमण से लेकर अब तक भोजशाला को उसकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष जारी है.
भोजशाला मंदिर या मस्जिद, साइंटिफिक सर्वे पूरा

बता दें की हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि.. भोजशाला का पूर्ण आधिपत्य हिंदुओं को सौंपा जाए.
ये मंदिर है या मस्जिद इसका कैरेक्टर तय करने के लिए एएसआई से साइंटिफिक सर्वे कराया जाए. 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा.
एएसआई ने फिर समय मांगा जिसपर कोर्ट ने 15 जुलाई तक की तारीख दी. इस तारीख को एएसआई ने साइंटिफिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी. जिसके बाद एएसआई ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और कार्बन डेटिंग मेथड की मदद से अपना सर्वे शुरू किया.
DHAR BHOJSHALA NEWS: मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

दूसरी तरफ हाईकोर्ट के 11 मार्च के 2024 के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2024 को विशेष अनुमति याचिका लगाई. 1 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिया। जिसमें साइंटिफिक सर्वे पर रोक नहीं लगाई. लेकिन सर्वे रिजल्ट के आधार पर बिना सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के निर्णय लेने पर रोक लगाई..
साथ ही सर्वे रिपोर्ट को गुप्त रखने और सार्वजनिक न करने के निर्देश दिए. बता दें की सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्ष ने कहा कि.. 2003 के ऑर्डर के खिलाफ हिन्दू पक्ष कोर्ट चला गया और 2019 में दायर मुस्लिम पक्ष की याचिका को फॉलो नहीं किया.
सर्वे रिपोर्ट के बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई मेंशन
एएसआई की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में मेंशन लगाकर रिपोर्ट के आधार पर फैसले पर लगी रोक हटाने और हाई कोर्ट को निर्णय लेने के लिए डायरेक्शन देने की मांग की थी। अब ये पूरा मामला न्यायालय के विचाराधीन है।
